अतिक्रमण हटाओ अभियान, पक्षपात के आरोपों में

फतेहपुर सीकरी में चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, लेकिन पक्षपात के आरोपों में घिरा रेलवे प्रशासन

फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक चौधरी बाबूलाल द्वारा कुछ दिन पूर्व रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी डीआरएम (डिवीजनल रेलवे मैनेजर) पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें “निकम्मा” करार दिया गया था। विधायक ने मीडिया को बयान देते हुए कहा था कि डीआरएम क्षेत्र में किसी भी प्रकार का काम नहीं कर रहे हैं और फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर तेजी से अतिक्रमण हो रहा है, जिसे रोकने में रेलवे प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है इस बयान के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आया और आज रेलवे सुरक्षा बल (RPF) व रेलवे अधिकारियों की टीम ने फतेहपुर सीकरी में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। यह अभियान महाराजा स्कूल से लेकर इसलामगंज रेलवे फाटक तक चलाया गया। हालांकि इस कार्रवाई ने स्थानीय लोगों के बीच असंतोष और आक्रोश की स्थिति पैदा कर दी है।

पक्षपात के आरोप में घिरा अभियान

स्थानीय निवासियों ने रेलवे अधिकारियों व RPF की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण करार देते हुए आरोप लगाया कि इस अभियान के दौरान केवल कुछ दुकानदारों की दुकानों के सामने बने सीमेंट, कंक्रीट के फर्श व पत्थर के चौकों से बने फर्श को जेसीबी से तोड़ा गया, जबकि कई प्रभावशाली दुकानदारों के अवैध निर्माण को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि दबंग और रसूखदार व्यापारियों की दुकानों के आगे बने पक्के फर्श पर रेलवे प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह अभियान केवल गरीब, मध्यम वर्गीय और ईमानदार लोगों के खिलाफ चलाया गया है, जबकि दबंगों और नेताओं से जुड़े लोगों को खुली छूट दी गई।

रेलवे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल

यह स्थिति रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक ओर रेलवे यह दावा करता है कि वह अतिक्रमण हटाने के लिए समान रूप से कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से उसकी साख को गहरा आघात पहुंचा है। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि जब तक पूरे क्षेत्र में निष्पक्ष और समान रूप से कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक रेलवे का यह अभियान केवल दिखावा और जनप्रतिनिधियों के दबाव में लिया गया कदम माना जाएगा।

विधायक के आरोप हुए सत्य सिद्ध

इस समूचे घटनाक्रम को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि विधायक चौधरी बाबूलाल द्वारा रेलवे प्रशासन और डीआरएम पर लगाए गए आरोपों में सच्चाई है। यदि वास्तव में रेलवे अधिकारी निष्पक्ष होते, तो हर दुकानदार के साथ समान व्यवहार होता, चाहे वह छोटा व्यापारी हो या प्रभावशाली व्यक्ति। अब देखना यह होगा कि क्या रेलवे प्रशासन इन आरोपों का संज्ञान लेता है और भविष्य में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या यह अभियान मात्र एक राजनीतिक दबाव का परिणाम बनकर रह जाएगा।

 

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