कैसे धन्यवाद करूँ अपने प्रभु श्री राम का!! मेरे पास शब्द ही नहीं.. मेरा तो जीवन धन्य हो गया: चंद्रवीर फौजदार

अर्जुन रौतेला आगरा। जीवन में जब पूर्व जन्म या इस जन्म के सत्कर्मों का फल मिलता है तो किसी को राजा जनक, किसी को राजा दशरथ और किसी को स्वरूप प्रभारी बनकर प्रभु की सेवा का पुण्यदायी सुअवसर मिलता है।


कुछ ऐसा ही भाग्य जागा है दयालबाग स्थित पुष्पांजलि हाइट्स निवासी जूता उधमी, समाजसेवी व राधा स्वामी सत्संगी चंद्रवीर फौजदार का, जिनको 2022 में दयालबाग, 2023 में संजय प्लेस और 2024 में जयपुर हाउस में स्वरूप प्रभारी के रूप में सराहनीय भूमिका निभाने के बाद अब कमला नगर में आयोजित होने वाली जनकपुरी महोत्सव में प्रभु राम सहित सभी स्वरूपों को लाने ले जाने की सेवा का पुण्यदायी सुअवसर लगातार चौथी बार मिला है।
चंद्रवीर फौजदार यादों में डूबते हुए बताते हैं कि 2022 में जब दयालबाग में जनकपुरी सजी तब पहली बार भगवान राम, उनके तीनों भाई और माता सीता की सेवा का उन्हें सौभाग्य मिला। ऐसा लगा जैसे उनका निवास राम का धाम बन गया हो। वह कहते हैं कि मैं नहीं भूल पाऊंगा उन पलों को जब हमारे प्रभु श्री राम, सीता माता और अपने भाइयों सहित मेरी कुटिया में पधारे।ऐसा महसूस हुआ जैसे प्रभु माता सबरी के यहाँ पधारे हों.. जब सियाराम जी की विदाई का क्षण आया, हमारे पूरे परिवार की आँखों से आँसू छलक पड़े। हृदय उनको जाते हुए देखकर उदास था परन्तु इस बात की खुशी भी थी कि हमने अंतर्मन से अपने आराध्य की सेवा की और हमें प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।


अब चौथी बार जिम्मेदारी मिलने पर वह कहते हैं, “कैसे धन्यवाद करूँ अपने श्री राम का!! मेरे पास शब्द ही नहीं..मेरा तो जीवन धन्य हो गया।”

16 से 20 सितंबर तक पाँच दिन रहेगी निरंतर सेवा

कमला नगर में आयोजित होने वाले जनकपुरी महोत्सव में 16 सितंबर को मेहंदी की रस्म एवं महिला संगीत, 17 सितंबर को गौरा पूजन के लिए सीता जी का डोला भ्रमण के बाद 18 सितंबर को सभी स्वरूपों के जनकपुरी में आगमन से लेकर 20 सितंबर की रात को जानकी माता की विदाई तक सभी स्वरूपों को यथास्थान लाने ले जाने की प्रमुख जिम्मेदारी स्वरूप प्रभारी चंद्रवीर फौजदार पर रहेगी। इनका सहयोग संतोष गुप्ता, तपन अग्रवाल और विनय आगरी करेंगे।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवादाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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