जावरा में श्रद्धा से मनाई गई सर्वपितृ अमावस्या
पूर्वजों को तर्पण व दान कर दी भावभीनी विदाई
जावरा (जिला रतलाम), संवाददाता श्याम राठौर।
आज रविवार को पूरे जावरा नगर सहित रतलाम जिले में सर्वपितृ अमावस्या का पर्व आस्था और श्रद्धा से मनाया गया। पितृ पक्ष के समापन पर लोगों ने अपने पूर्वजों को याद कर तर्पण, श्राद्ध और दान के माध्यम से उन्हें विदाई दी।
घाटों और मंदिरों पर उमड़ा जनसैलाब
सुबह से ही नगर के मंदिरों और घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। कई परिवारों ने नदी-घाट पर पहुंचकर पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध किया। वहीं, जो लोग दूर नहीं जा सके, उन्होंने घर पर ही दीपक, धूप और जल अर्पित कर पूर्वजों का स्मरण किया।
“ओं पितृ देवो नमः” से गूंजा वातावरण
पूरे दिन नगर के विभिन्न स्थानों पर “ओं पितृ देवो नमः” के मंत्रोच्चार गूंजते रहे। धर्मगुरुओं के अनुसार, इस दिन किया गया तर्पण और दान पितरों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
ब्राह्मण भोज व दान की परंपरा
अनेक परिवारों ने ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा अन्न–वस्त्र का दान कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी। कुछ सामाजिक संस्थाओं ने भी जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण और सेवा कार्य किए।
पंडितों का मत
स्थानीय पंडितों ने बताया कि जो लोग पूरे पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाते, वे केवल सर्वपितृ अमावस्या पर विधिपूर्वक तर्पण कर सकते हैं। इसे “सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या” भी कहा जाता है।
आस्था और परंपरा का संगम
नगर के प्रमुख मंदिर जैसे हनुमान मंदिर, कंकाली माता मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का आना-जाना दिनभर जारी रहा। श्रद्धालुओं ने पितरों के आशीर्वाद और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
अंत में नगरवासियों ने ‘ओं पितृ देवो नमः’ का उच्चारण कर श्राद्ध-दान का समापन किया और अपने पूर्वजों को भावभीनी विदाई दी।
रिपोर्टर : श्याम राठौर
जावरा, जिला रतलाम (मध्यप्रदेश)
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