देश का टेक्सटाइल उद्योग एवं व्यापार गहरे संकट में सहायता पैकेज के लिए सी ए आई टी अध्यक्ष श्री चंपालाल बोधरा जी ने केंद्र से लगाई गुहार

गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

*टेक्सटाइल उद्योग एवं व्यापार गहरे संकट में – केंद्र सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग: चम्पालाल बोथरा (CAIT)*

देश का टेक्सटाइल, गारमेंट उद्योग तथा इससे जुड़ा विशाल ट्रेडिंग सेक्टर वर्तमान में अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब—Erode, Tiruppur, Surat, Ahmedabad, Mumbai, Jaipur panipat ludhiyana Bhilwara एवं Bhiwandi—में उत्पादन की गति थमने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं। वैश्विक उथल-पुथल और वेस्ट एशिया में जारी युद्ध ने इस पूरे इकोसिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए Confederation of All India Traders (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल तथा CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल को पत्र लिखकर व्यापारियों, मैन्युफैक्चरर्स एवं टेक्सटाइल उद्योग के सभी घटकों के लिए तत्काल विशेष राहत पैकेज की मांग की है।

*संकट के मुख्य कारण: लागत में बेतहाशा वृद्धि और घटती मांग*

वर्तमान युद्ध के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे लागतों में 25% से 40% तक की वृद्धि दर्ज की गई है:

•   कच्चा माल व केमिकल्स: डाई एवं केमिकल्स की कमी से प्रोसेसिंग यूनिट्स प्रभावित हैं। कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता के कारण व्यापारियों के लिए ऑर्डर बुक करना जोखिमपूर्ण हो गया है।

•   ऊर्जा व लॉजिस्टिक्स: गैस, बिजली और समुद्री भाड़े में भारी वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय टेक्सटाइल की प्रतिस्पर्धात्मकता घट रही है।

*मजदूर पलायन और बढ़ती अनिश्चितता*

जमीनी स्तर पर स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। Surat और Tiruppur जैसे प्रमुख केंद्रों में, जहां मशीनें 24 घंटे चलती थीं, वहां अब 30–40% उत्पादन कटौती के कारण सन्नाटा छा गया है।

•   श्रमिकों का पलायन: काम की कमी एवं यूनिट्स के आंशिक बंद होने से बड़ी संख्या में स्किल्ड लेबर अपने गृह राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार एवं ओडिशा—की ओर लौट रहे हैं। यह पलायन यदि जारी रहा, तो भविष्य में उद्योग के पुनः सामान्य होने पर भी कुशल श्रमिकों की भारी कमी हो सकती है।

•   अनिश्चित भविष्य: युद्ध समाप्त होने के बाद भी केमिकल, गैस एवं लॉजिस्टिक्स सप्लाई कब तक सामान्य होगी, यह स्पष्ट नहीं है। इस अनिश्चितता के कारण उद्योगपति निवेश एवं उत्पादन निर्णय लेने में असमंजस में हैं, वहीं श्रमिक वर्ग भी आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहा है।

*पेमेंट रोटेशन और स्टॉक का गंभीर संकट*

•   स्टॉक जाम: बाजार में मांग कमजोर होने के कारण व्यापारियों का करोड़ों रुपये का माल फंसा हुआ है।

•   लिक्विडिटी क्रंच: रिटेल और होलसेल बाजारों में भुगतान चक्र रुकने से नकदी संकट गहराता जा रहा है।

*MSME और ट्रेडर्स पर बढ़ता दबाव*

लगभग 40–45% MSME उद्यमी और छोटे व्यापारी डिफॉल्ट की स्थिति में पहुंच रहे हैं। बैंक लोन की EMI और वर्किंग कैपिटल की कमी के चलते अनेक इकाइयां बंद होने के कगार पर हैं।

बोथरा ने बताया की यह केवल व्यापार का संकट नहीं है, बल्कि करोड़ों परिवारों के जीवन और रोजगार से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका प्रभाव पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।”

*केंद्र सरकार से प्रमुख मांगें*

1. लोन मोरेटोरियम: सभी टेक्सटाइल MSMEs एवं व्यापारियों को 6 से 12 माह की राहत

2. ब्याज सब्सिडी: Interest Subvention योजना को पुनः लागू किया जाए

3. ऊर्जा राहत: गैस एवं बिजली दरों पर तत्काल सब्सिडी

4. GST रिफंड: रिफंड प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक किया जाए

5. वर्किंग कैपिटल सपोर्ट: बिना अतिरिक्त कोलैटरल के क्रेडिट लिमिट बढ़ाई जाए

6. लेबर वेलफेयर: मजदूर पलायन रोकने हेतु विशेष सहायता पैकेज की व्यवस्था की जाए

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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