गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
देश में बढ़ रही बाल तस्करी के गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि राज्य सरकारें इस दिशा में तुरंत और प्रभावी कदम नहीं उठाती हैं, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है।
अदालत ने राज्यों के ढीले रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई राज्यों द्वारा अब तक पर्याप्त अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की गई है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश, गोवा, हरियाणा सहित अन्य राज्यों ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि बाल तस्करी के मामलों में केवल जांच पूरी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव तस्करी के नेटवर्क को समाप्त करने और जांच प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि राज्यों को बाल तस्करी के संभावित हॉटस्पॉट की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ानी चाहिए और हर मामले में त्वरित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, बाल संरक्षण से जुड़े तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कई राज्यों द्वारा प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, जो चिंताजनक है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो बाल तस्करी जैसी गंभीर समस्या पर नियंत्रण पाना और कठिन हो जाएगा
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