महेशपुर: पाता मेला में खेल और परंपरा का संगम, उपासना मरांडी ने फाइनल मैच का किया शुभारंभ

सांस्कृतिक धरोहर: विजेता टीम को मिला 60 हजार का पुरस्कार; उपासना मरांडी बोलीं— ऐसे आयोजनों से बढ़ता है भाईचारा और सांस्कृतिक गौरव।

महेशपुर: प्रखंड के भेटाटोला पंचायत अंतर्गत ग्राम अहिल्यापुर स्थित फुटबॉल मैदान में झारखंड नवयुवक संघ अहिल्यापुर द्वारा पाता मेला (चड़क पूजा मेला) के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय गेंदरेच् बॉल खेल प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ। इस प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में मुख्य अतिथि के रूप में झामुमो (JMM) केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी उपस्थित रहीं। मैदान आगमन पर आयोजकों ने आदिवासी पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

खिलाड़ियों से परिचय कर बढ़ाया हौसला

मैच की शुरुआत से पहले मुख्य अतिथि उपासना मरांडी ने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से मैदान पर परिचय प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने बॉल को आसमान में उछालकर फाइनल मुकाबले का विधिवत शुभारंभ किया।

रोमांचक मुकाबले में गोविंदपुर की टीम बनी चैंपियन

प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला एफ.सी. चांदो इपिल गोविंदपुर और एफ.सी. चापाखिया महेशपुर के बीच खेला गया। दोनों टीमों के बीच बेहद कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। अंततः एफ.सी. चांदो इपिल गोविंदपुर की टीम ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए एक गोल की बढ़त के साथ जीत हासिल की और खिताब अपने नाम कर लिया।

मुख्य अतिथि उपासना मरांडी द्वारा पुरस्कार की राशि वितरित की गई:

  • विजेता टीम (गोविंदपुर): ₹60,000 की पुरस्कार राशि।

  • उपविजेता टीम (महेशपुर): ₹50,000 की पुरस्कार राशि।

“खेल से होता है मानसिक और शारीरिक विकास”

उपस्थित जनसमूह और खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए उपासना मरांडी ने कहा कि खेल न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने स्थानीय युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा को निखारने और झारखंड का नाम पूरे देश में रोशन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आगे कहा:

“राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी द्वारा खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। युवाओं को इन योजनाओं का बढ़-चढ़कर लाभ उठाना चाहिए और खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहिए।”

परंपरा और संस्कृति को सहेजने की अपील

पाता मेला (चड़क पूजा मेला) की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह मेला आदिवासी समाज की अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली परंपरा है, जो पूर्वजों के समय से ही विभिन्न गांवों में आयोजित होती आ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा, एकता और सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा मिलता है, जिससे हमारे पारंपरिक मूल्य और मजबूत होते हैं।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस बड़े खेल उत्सव के दौरान मुन्ना प्यारेलाल मुर्मू, सेल्सुस किस्कू, गेब्रियल सोरेन, बाबू हेंब्रम, मार्शल हेंब्रम, शीतल मुर्मू, कॉर्नेल किस्कू, देवीलाल हांसदा, बाबूधन किस्कू सहित कई अन्य झामुमो कार्यकर्ता, खेल क्लब के अध्यक्ष, सचिव, सभी सम्मानित सदस्य एवं क्षेत्र के हजारों की संख्या में खेलप्रेमी व दर्शक मौजूद थे।

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