“सनातन समागम” में गूंजा धर्म रक्षा और सामाजिक एकजुटता का संदेश

आगरा। सनातन मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक समरसता और जागरूकता के उद्देश्य से सनातन रक्षा ट्रस्ट द्वारा आयोजित “सनातन समागम” का भव्य आयोजन होटल जेएमएस इन, बोदला में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं प्रभु श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।


कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनुराग शर्मा ने सनातन रक्षा ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि शहर में विभिन्न स्थानों पर “सनातन मिलन” आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य समाज को एकजुट करना और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
मुख्य वक्ता एवं सेंट जॉन्स कॉलेज के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित आर्य ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि सनातन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है, जो सम्पूर्ण विश्व को एक सूत्र में बांधने की क्षमता रखती है।


विकास गुप्ता “सियाराम” ने कहा कि सेवा के साक्षी सिर्फ ईश्वर होते हैं। स्वयंसेवक के दिल में शंका नहीं शंकर बसे हैं। सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली शक्ति है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने, संस्कारों को अपनाने और एक-दूसरे की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की पहचान होता है।


डॉ. काजल शर्मा ने महिलाओं से इस जागरूकता अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार में सनातन मूल्यों की स्थापना में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ओजस्वी कवि सचिन दीक्षित “सारंग” ने अपनी स्वरचित राष्ट्रवादी एवं सनातन विषयक कविताओं से वातावरण को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।


श्री भवेंद्र जी ने मंदिरों को पुनः समाज के शक्ति केंद्र बनाने पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक सनातनी को सप्ताह में कम से कम एक दिन मंदिर में बैठकर संवाद एवं विचार-विमर्श करना चाहिए, जिससे सामाजिक एकजुटता और पारस्परिक सहयोग की भावना मजबूत हो।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एडवोकेट डॉ. हेमेंद्र पाठक ने कहा कि सनातन की शुरुआत अपने घर और परिवार से होती है। उन्होंने समाज को गैर-सनातनी गतिविधियों के प्रति सजग रहने और बच्चों को संस्कारयुक्त वातावरण देने का संदेश दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में अवनी सारस्वत ने “रघुवर पधारो” गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। वहीं सात वर्षीय सरिशा मल्होत्रा की प्रस्तुति ने भी खूब सराहना प्राप्त की। सचिन जैन ने अपनी प्रभावशाली कविता से समागम में नई ऊर्जा का संचार किया।


कार्यक्रम में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागी बच्चों को नवीन अरोरा, शैलेन्द्र जी, आशु एवं अमित कपूर द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। संचालन डॉ. अनुराग शर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन साकेत भूषण द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत प्रमोद जी, श्याम जी, प्रदीप, अनुपम, जनार्दन, डॉ. दिवाकर तिवारी, विक्की, रितिका अरोड़ा एवं मोनिका जी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अशोक तोमर, श्याम तिवारी, सुधीर टंडन, मनोज सबनानी, डॉ. दिवाकर तिवारी, अनुपम शर्मा, शोभित, रोहित, रामेश्वर वर्मा, प्रदीप पाठक एवं प्रमोद महाजन सहित अनेक कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा।

समागम में भगवान शर्मा, श्याम किशोर जी, सतीश चंद्र गुप्ता, अशोक अग्रवाल, रवि कन्नौटिया, डॉ. वीके माहेश्वरी, डॉ. हरिओम सारस्वत, विनोद जी, दिनेश पराशर, रविंद्र जैन, विवेक गोयल, अंकुर जैन (सीए) सहित लगभग 600 सनातनी बंधुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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