पाकुड़ में बेरोजगारी का दंश: कोल माइंस और पत्थर उद्योग के बावजूद युवा पलायन को मजबूर, नशे और अवैध धंधों की गर्त में डूब रही नई पीढ़ी

स्थानीय संसाधनों पर बाहरी वर्चस्व? कल-कारखाने न होने से युवाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट; स्थानीय विधायक और सांसद से रोजगार देने की गुहार।

 

पाकुड़। खनिज संपदा से धनी और एशिया प्रसिद्ध पत्थर उद्योग (Stone Industry) के लिए जाने जाने वाले पाकुड़ जिले में इस वक्त एक बेहद चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां जिले की धरती कोयला और पत्थर उगल रही है, वहीं दूसरी तरफ यहां का युवा वर्ग बेरोजगारी के भयानक दौर से गुजर रहा है। पाकुड़ में बड़े कल-कारखानों का घोर अभाव है, जिसके कारण शिक्षित और कुशल युवाओं को अपनी मातृभूमि छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि पाकुड़ में विशाल कोल माइंस (Coal Mines) और सैकड़ों पत्थर क्रशर संचालित हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को इनमें सम्मानजनक रोजगार नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन उद्योगों में बड़े पदों और नियमित रोजगार में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि स्थानीय युवाओं को सिर्फ मजदूरी या उपेक्षा हाथ लगती है।

बेरोजगारी के कारण बढ़ा अपराध: ‘अवैध एटीएम’ और ‘लॉटरी’ का जाल

जब पेट भरने का कोई वैध साधन नहीं मिलता, तो भटकाव स्वाभाविक हो जाता है। पाकुड़ में भी बेरोजगारी के इसी दंश के कारण युवा पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा अपराध के दलदल में धंसता जा रहा है। रोजगार के अभाव में जिले के कई युवा शॉर्टकट का रास्ता अपना रहे हैं और अवैध एटीएम से पैसे उड़ाना/क्लोनिंग) तथा अवैध लॉटरी बेचने जैसे गैर-कानूनी धंधों में संलिप्त हो रहे हैं।

“जिले में संसाधन होने के बावजूद यदि युवाओं को सही दिशा और काम नहीं मिलेगा, तो वे भटकेंगे ही। आज पाकुड़ का युवा मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाने को विवश है या फिर गलत संगत में पड़ रहा है।” — स्थानीय नागरिक, पाकुड़

नशे की लत और आए दिन बढ़ती चोरियां

बेरोजगारी और मानसिक तनाव ने जिले में एक और गंभीर समस्या को जन्म दिया है—नशे की लत। पाकुड़ के शहरी और ग्रामीण इलाकों में युवाओं के बीच नशीले पदार्थों का सेवन तेजी से बढ़ा है। इस लत की पूर्ति के लिए पैसों की जरूरत होती है, और यही कारण है कि पाकुड़ में आए दिन चोरी की घटनाएं बाढ़ की तरह बढ़ गई हैं। छोटी-मोटी चोरियों से लेकर घरों के ताले टूटने तक की वारदातों के पीछे अधिकांशतः नशे के आदी युवा ही शामिल पाए जा रहे हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

स्थानीय विधायक और सांसद से आस: स्थानीय को मिले रोजगार

पाकुड़ के युवाओं और आम जनता की नजरें अब पूरी तरह से अपने जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। जिले के युवाओं ने माननीय स्थानीय विधायक मैडम और सांसद महोदय से पुरजोर गुहार लगाई है कि वे इस गंभीर मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर ठोस पहल करें।

युवाओं की प्रमुख मांगें:

  1. स्थानीय नीति का कड़ाई से पालन: पाकुड़ में संचालित कोल माइंस और पत्थर उद्योगों में कम से कम 75% स्थानीय युवाओं को अनिवार्य रूप से रोजगार दिया जाए।

  2. नए कल-कारखानों की स्थापना: जिले में कृषि आधारित या अन्य सहायक उद्योगों (Auxiliary Industries) को बढ़ावा दिया जाए ताकि नए रोजगार सृजित हों।

  3. कौशल विकास केंद्र और नशामुक्ति: युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जाए और जो युवा नशे की गर्त में जा चुके हैं, उनके पुनर्वास के लिए सरकारी स्तर पर नशामुक्ति केंद्र खोले जाएं।

अगर समय रहते पाकुड़ के युवाओं की इस सामूहिक चीख को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुना, तो आने वाले समय में पलायन और अपराध का यह ग्राफ जिले के भविष्य को पूरी तरह अंधकार में धकेल देगा।

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