एक हफ्ते में पूरी करें सेविका-सहायिका की बहाली; गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव कराने का सख्त अल्टीमेटम।
पाकुड़: जिला समाहरणालय स्थित सभागार में बुधवार को उपायुक्त मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की एक महत्वपूर्ण संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों विभागों द्वारा धरातल पर चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि जनहित के कार्यों में गति लाएं और आपस में बेहतर समन्वय बनाकर काम करें।
डेटा में नहीं चलेगी विसंगति, आंकड़ों में हो पूर्ण सामंजस्य
बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग की अधिकांश योजनाएं एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हुई हैं। इसलिए दोनों विभागों के आंकड़ों (डेटा) में पूर्ण सामंजस्य होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी स्तरों पर सही डेटा संधारण और पारदर्शी रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए ताकि योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और सटीक मूल्यांकन हो सके।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस, होम डिलीवरी मामलों की होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने मातृत्व सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए:
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नियमित एएनसी जांच: सभी गर्भवती महिलाओं की समय पर और नियमित एएनसी (ANC) जांच सुनिश्चित की जाए।
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संस्थागत प्रसव: अस्पतालों में सुरक्षित और संस्थागत प्रसव की संख्या में हर हाल में वृद्धि लाई जाए।
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कमेटी का गठन: जिले में होने वाले होम डिलीवरी (घर पर प्रसव) के मामलों की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाए, जो वस्तुस्थिति का आकलन कर सुधारात्मक कार्रवाई करेगी।
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टीकाकरण: जिले के सभी नवजात और पात्र बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

एक सप्ताह में पूरी करें सेविका-सहायिका की नियुक्ति प्रक्रिया
समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों में रिक्त पदों को भरने का आदेश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में ग्रामसभा और अन्य औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, वहां लंबित मामलों का सत्यापन उप विकास आयुक्त (DDC) के माध्यम से कराते हुए एक सप्ताह के भीतर सेविका और सहायिका की नियुक्ति प्रक्रिया को हर हाल में पूर्ण किया जाए।
एफआरएस (FRS) के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना
फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने जिला समाज कल्याण पदाधिकारी और सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPOs) को एक विशेष कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके लिए शिविरों (कैंपों) के आयोजन हेतु तिथि और स्थल का चयन कर विस्तृत प्रस्ताव जल्द से जल्द जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा, नवनियुक्त महिला पर्यवेक्षिकाओं (Supervisors) को विभागीय कार्यों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रशिक्षण देने का भी निर्णय लिया गया।
बैठक में ये रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक में मुख्य रूप से उप विकास आयुक्त (DDC), सिविल सर्जन, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, डीपीएम, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सीडीपीओ और दोनों ही विभागों के कई अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।
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