रिपोर्टर – दिलशाद अहमद फतेहपुर सीकरी
विश्व प्रसिद्ध हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का बुधवार देर रात इंतकाल हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही फतेहपुर सीकरी सहित देशभर के सूफी अनुयायियों, जायरीन और अकीदतमंदों में गहरा दुख व्याप्त है।
परिवार के अनुसार, पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने बुधवार रात लगभग 11:30 बजे लखनऊ स्थित एरा मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और उपचाराधीन थे।
उनके पुत्र अरशद फरीदी ने बताया कि मरहूम का जनाजा गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को असर की नमाज के बाद शाम करीब 5:15 बजे फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों से जायरीन, उलेमा, सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
बताया जाता है कि पीरजादा रईस मियां चिश्ती, सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की 16वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज थे। उन्होंने लंबे समय तक दरगाह के सज्जादानशीन के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सूफी परंपरा के प्रेम, अमन, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को आगे बढ़ाया।
वे अपनी सादगी, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सभी धर्मों के लोगों के प्रति आत्मीय व्यवहार के लिए सम्मानित थे। दरगाह पर आने वाले लाखों जायरीन की सेवा और व्यवस्थाओं को लेकर भी वे लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहे। सामाजिक सद्भाव, गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
उनके इंतकाल को सूफी परंपरा और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अकीदतमंदों का कहना है कि रईस मियां चिश्ती की शिक्षाएं, विचार और मानवता का संदेश आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
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