अर्जुन रौतेला आगरा। देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, आगरा के तत्वावधान में गुरु व्यास पूर्णिमा के उपलक्ष्य में “हृदयंगम्-103” के रसानंद में कंठोष्ठ्य पावस उत्सव का आयोजन खंदारी स्थित राधिका टेंट हाउस में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ ने कहा कि गुरु के ज्ञान के बिना मानव जीवन की सार्थकता अधूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आजीवन गुरु की शरण एवं उनके मार्गदर्शन में समर्पित भाव से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने युवा पीढ़ी से गुरु-परंपरा और संस्कारों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इसके माध्यम से ही देश की भावी पीढ़ी को सुरक्षित एवं संस्कारित बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्कार भारती, आगरा ब्रज प्रांत के महामंत्री नंदनंदन गर्ग ने कहा कि गुरु वेदव्यास ने वैदिक काल में ही भारत के भविष्य और गुरु परंपरा की महत्ता को स्थापित कर दिया था। उन्होंने कहा कि माता-पिता आत्मा हैं तो गुरु परमात्मा के समान हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं कवि सम्राट डॉ. राजेंद्र मिलन को संस्था की ओर से “हिंदी साहित्य पुरोधा” की उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम संयोजक श्रीकृष्ण ने आमंत्रित अतिथियों एवं कवि-कवयित्रियों का स्वागत एवं सम्मान किया।

कार्यक्रम का गौरवपूर्ण संचालन संस्था के अध्यक्ष कवि डॉ. यशोयश ने किया। समापन अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक इंदल सिंह ‘इंदु’ ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

काव्य-पाठ करने वालों में डॉ. यशोयश, डॉ. राजेंद्र मिलन, डॉ. ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’, रामेंद्र कुमार शर्मा, प्रभुदत्त उपाध्याय, प्रकाश गुप्ता ‘बेबाक’, रूपेश कुलश्रेष्ठ, बाल कवयित्री ह्युमिता धनगर, बाल कवि युवांश धनगर, आचार्य उमाशंकर पाराशर, अशोक गोयल, नंदनंदन गर्ग, राम अवतार शर्मा, अतुल दुबे, इंदल सिंह ‘इंदु’ एवं संजय कुमार एडवोकेट शामिल रहे। सभी रचनाकारों ने गुरु वेदव्यास की महिमा और गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं।

इस अवसर पर गुरु पूर्णिमा पर्व को साहित्य, संस्कृति और काव्य के रंगों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।
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