गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
सूरत के एम्ब्रॉयडरी उद्योग में 8 घंटे की ड्यूटी और साप्ताहिक अवकाश को लेकर विवाद
एम्ब्रॉयडरी खातेदारों ने 10 अक्टूबर को महासम्मेलन बुलाने की घोषणा की
गुजरात प्रदेश सूरत शहर के एम्ब्रॉयडरी उद्योग में कारीगरों द्वारा 8 घंटे की ड्यूटी और साप्ताहिक अवकाश की मांग को लेकर शुरू किए गए आंदोलन के बाद एम्ब्रॉयडरी खातेदारों और जॉब वर्क एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया है।
अमरोली क्षेत्र में काम बंद आंदोलन के बाद कलेक्टर कार्यालय में आयोजित बैठक में श्रम विभाग द्वारा एम्ब्रॉयडरी खातेदारों को कानून एवं नियमों के अनुसार कारीगरों से काम करवाने की सूचना दी गई थी।
इसके बाद एम्ब्रॉयडरी खातेदारों ने एकजुट होकर निर्णय लिया है कि यदि कारीगर सरकारी कानून के अनुसार काम करने की मांग करते हैं, तो उद्योग में भी सभी नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। खातेदारों के अनुसार, अब तक कारीगरों को उपलब्ध कराई जा रही रहने की व्यवस्था और बिजली बिल जैसी सुविधाओं को बंद किया जा सकता है।
सरकार द्वारा निर्धारित 8 घंटे की ड्यूटी के अनुसार प्रतिदिन न्यूनतम ₹522 वेतन देने की बात कही गई है। खातेदारों का कहना है कि पहले कारीगरों को कारखाने में रहने के लिए कमरा उपलब्ध कराया जाता था और उसका बिजली बिल भी मालिकों द्वारा भरा जाता था। अब नियमों के अनुसार काम होने की स्थिति में रहने और बिजली का खर्च कारीगरों को स्वयं उठाना पड़ सकता है।
इसके अलावा, काम के दौरान कारीगर की गलती से साड़ी अथवा कपड़े का डिजाइन खराब होने या माल को नुकसान पहुंचने पर पहले खातेदार नुकसान सहन कर लेते थे। अब कारीगर की गलती से माल खराब होने पर नुकसान की भरपाई कारीगर से कराने की बात कही गई है।
कारीगरों के वेतन को लेकर भी ‘डे-टू-डे’ भुगतान व्यवस्था लागू करने की बात सामने आई है। यानी जिस दिन कारीगर काम करेगा, उसी दिन का वेतन मिलेगा और जिस दिन काम नहीं करेगा, उस दिन का वेतन नहीं मिलेगा।
इस पूरे मामले में आगे की संयुक्त रणनीति तय करने के लिए सूरत के एम्ब्रॉयडरी कारखानेदारों द्वारा आगामी 10 अक्टूबर को महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। महासम्मेलन में उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
वही मजदूर नेता श्री अजय दुबे जी ने कहा कि किसी के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाना नहीं था। मेरा भावार्थ सिर्फ इतना है कि अगर कुछ दिन हम शांति से घर बैठ जाएँ और गाँव चले जाएँ, तो मालिक और मजदूरों के बीच अनावश्यक घर्षण की स्थिति नहीं बनेगी!
अगर कोई सेठ कहता है कि वह कंपनी में ताला लगा देगा, तो कुछ दिन उन्हें भी कंपनी बंद रखने दीजिए। हम भी शांति से घर बैठकर दिवाली और छठ पूजा अपने परिवार के साथ मनाएँ। जिन मजदूर साथियों की गाँव में खेती-बाड़ी या माता-पिता की जिम्मेदारी है, वे इस समय को अपने परिवार को दें। इससे माहौल भी शांत होगा!
हम नहीं चाहते कि मालिक और मजदूरों के बीच किसी भी प्रकार का विवाद या टकराव हो, हम चाहते हैं कि व्यापार भी आगे बढ़े और मजदूरों को भी सम्मान तथा उनके कानूनी अधिकार मिलें!
जब मालिक खुद फोन करेंगे, हमारी सीधी-सी बात होगी
साप्ताहिक छुट्टी मिलेगी तो काम करेंगे, नहीं मिलेगी तो काम नहीं करेंगे, और जिन कंपनियों में मजदूरों को साप्ताहिक छुट्टी नहीं दी जा रही है, उनके खिलाफ हम कानूनी तरीके से शिकायत और कार्रवाई करेंगे!
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट
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