फतेहपुर सीकरी में पर्यटकों की सुरक्षा भगवान भरोसे, शाम ढलते ही पसर जाता है अंधेरा, रखरखाव का अभाव

₹5000 तक मासिक किराया देने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे स्थानीय दुकानदार

फतेहपुर सीकरी। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी फतेहपुर सीकरी में करोड़ों रुपये की लागत से पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाया गया ‘गुलिस्ता कॉम्प्लेक्स’ आज अनदेखी और रखरखाव के अभाव में खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कॉम्प्लेक्स के अंदर जाली पत्थर की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि यह किसी खंडहर जैसा प्रतीत होने लगा है।
परिसर के चारों तरफ बड़ी-बड़ी घास और कंटीली झाड़ियां उग आई हैं, जिससे यहां हर समय जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा मंडराता रहता है। दुकानों के आसपास लगाई गई पत्थर की खूबसूरत जालियां जगह-जगह से टूट चुकी हैं। इसके अलावा, परिसर में आवारा पशुओं का आना लगा रहता है, जो अक्सर पर्यटकों के बीच घुस जाते हैं और उनके लिए परेशानी का सबब बनते हैं।

शाम होते ही हो जाता है हादसों का डर
सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ ही अब सूरज जल्दी ढल जाता है। ऐसे में गोल्फ कार्ट पार्किंग से लेकर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स परिसर की ओर जाने वाले मुख्य रास्ते पर एक भी स्ट्रीट लाइट सुचारू रूप से नहीं है। शाम होते ही पूरा रास्ता अंधेरे में डूब जाता है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि इस अव्यवस्था के कारण कई पर्यटक अंधेरे में लड़खड़ाकर गिर चुके हैं और चोटिल भी हुए हैं।

किराया पूरा, सुविधाएं शून्य
पार्किंग और कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में मौजूद दुकानदारों में आक्रोश है। दुकानदारों का कहना है कि वे हर महीने 4500 से 5000 रुपये तक का भारी-भरकम किराया नियमित रूप से विभाग को भर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें और यहां आने वाले सैलानियों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर आंखें मूंदे बैठे हैं।

खराब हो रही फतेहपुर सीकरी की छवि
देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की बदहाली देखकर भारत की पर्यटन व्यवस्था को लेकर एक नकारात्मक संदेश अपने साथ ले जा रहे हैं। दुकानदारों ने मांग की है कि पर्यटन सीजन को देखते हुए कॉम्प्लेक्स में और रास्ते पर तुरंत नई स्ट्रीट लाइटें लगवाई जाएं, झाड़ियों की सफाई हो और टूटी जालियों की मरम्मत कराई जाए, ताकि फतेहपुर सीकरी की वैश्विक छवि को धूमिल होने से बचाया जा सके।

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