दिवाली की मिठास सेहत पर न पड़े भारी, मिठाइयों के अधिक सेवन से बढ़ सकता है ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का खतरा

अर्जुन रौतेला आगरा। दीपावली का त्योहार मिठाइयों, पकवानों और पारिवारिक खुशियों के बिना अधूरा माना जाता है, लेकिन त्योहारों के दौरान बढ़ता मीठे और वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है। काजू कतली, गुलाब जामुन, लड्डू, बर्फी और घी से बने पकवानों का अधिक सेवन ब्लड शुगर, ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को त्योहारों की मिठास के साथ खान-पान में संतुलन और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है।

दिल्ली-NCR सहित हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में दीपावली के दौरान मिठाइयों और पारंपरिक पकवानों की खपत बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक दिन मिठाई खाने से मधुमेह या कोलेस्ट्रॉल की बीमारी नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक अधिक चीनी, कैलोरी और संतृप्त वसा का सेवन तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से मधुमेह, प्री-डायबिटीज, मोटापे और हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।


वर्ष 2023 में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 10.1 करोड़ लोग मधुमेह और 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज से प्रभावित थे। वहीं, करीब 21.3 करोड़ लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान और नियमित निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मिठाइयों में मौजूद अतिरिक्त चीनी रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ा सकती है। वहीं, घी, मलाई और खोये से बनी मिठाइयों का अधिक सेवन शरीर में वसा की मात्रा बढ़ाने और कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल को प्रभावित करने में योगदान दे सकता है। ब्लड शुगर की स्थिति जानने के लिए फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c तथा कोलेस्ट्रॉल की जानकारी के लिए लिपिड प्रोफाइल जांच उपयोगी है। इन जांचों के आधार पर चिकित्सक स्वास्थ्य जोखिम का आकलन कर उचित सलाह दे सकते हैं।


प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के महत्व को रेखांकित करते हुए दिल्ली की डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी BioCity Healthcare भी लोगों को समय पर स्वास्थ्य जांच और बीमारी की शुरुआती पहचान के प्रति जागरूक कर रही है। संस्था के सह-संस्थापक आशीष भदूला के नेतृत्व में लोगों को नियमित स्वास्थ्य निगरानी, संतुलित खान-पान और चिकित्सकीय परामर्श के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।


स्वस्थ दीपावली के लिए विशेषज्ञों ने मिठाइयों का सीमित सेवन करने, मीठे पेय पदार्थों से बचने, भोजन में फल एवं फाइबर शामिल करने, नियमित शारीरिक गतिविधियां अपनाने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को निर्धारित दवाओं और चिकित्सक द्वारा सुझाए गए खान-पान के नियमों का पालन करना चाहिए।
संदेश स्पष्ट है कि त्योहारों की खुशियों में मिठास जरूर घोलें, लेकिन सेहत की कीमत पर नहीं। समय पर जांच, संतुलित खान-पान और जागरूक जीवनशैली ही स्वस्थ भविष्य की असली पूंजी है।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

 

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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