प्रति,
माननीय श्री पीयूष गोयल जी
केंद्रीय मंत्री – वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
भारत सरकार, नई दिल्ली
विषय: पारंपरिक कपड़ा व्यापारियों के डिजिटल सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता:-
मान्यवर,
जय भारत ।
आपके कुशल नेतृत्व में भारत वैश्विक व्यापार क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। “आत्मनिर्भर भारत” और “लोकल टू ग्लोबल” जैसे प्रेरणादायी दृष्टिकोणों के माध्यम से देश की विनिर्माण और निर्यात क्षमता को नई ऊँचाइयाँ प्राप्त हो रही हैं।
किन्तु इस तीव्र डिजिटल परिवर्तन के युग में देश के करोड़ों पारंपरिक कपड़ा व्यापारी एवं MSME उद्यमी एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। Flipkart, Amazon, Zudio, Myntra, Ajio, Meesho जैसे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स द्वारा चलाए जा रहे भारी छूट मॉडल एवं असमान प्रतिस्पर्धा ने पारंपरिक बाजारों के अस्तित्व पर गंभीर प्रभाव डाला है।
देश की प्रमुख वस्त्र मंडियाँ – सूरत, तिरुपुर, लुधियाना, कोलकाता, अहमदाबाद, दिल्ली, इंदौर, जबलपुर, नोएडा सहित अनेक केंद्र — इस असंतुलन का प्रत्यक्ष अनुभव कर रही हैं।
पारंपरिक कपड़ा व्यापारियों की मुख्य माँगें निम्नलिखित हैं:
1️⃣ राष्ट्रीय “कपड़ा व्यापार संरक्षण नीति” का गठन किया जाए, जिससे परंपरागत व्यापार की रक्षा हो सके।
2️⃣ MSME व्यापारियों को ONDC जैसे सरकारी पोर्टलों पर विशेष प्राथमिकता एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
3️⃣ ई-कॉमर्स नियमों में छोटे व्यापारियों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
4️⃣ Digital Textile Marts की स्थापना कर पारंपरिक व्यापारियों को ई-वाणिज्य से जोड़ा जाए।
5️⃣ साइबर धोखाधड़ी, बिचौलियों की ठगी एवं भुगतान संबंधित विवादों से व्यापारियों की सुरक्षा हेतु कड़ा कानून बनाया जाए।
CAIT द्वारा डिजिटल सशक्तिकरण की पहल:
CAIT (Confederation of All India Traders) ने Meta (Facebook/Instagram) के सहयोग से पूरे भारत में MSME व्यापारियों के डिजिटल सशक्तिकरण हेतु एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया है।
श्री प्रवीन खंडेलवाल (सांसद, चांदनी चौक एवं CAIT महासचिव) के नेतृत्व में आयोजित इन कार्यक्रमों में लाखों व्यापारियों को डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग, और ई-वाणिज्य से जोड़ने का प्रशिक्षण दिया गया है।
यह स्पष्ट संकेत है कि पारंपरिक व्यापारी डिजिटल परिवर्तन को अपनाने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं – उन्हें केवल सरकार की नीति, संरक्षण एवं मंच की आवश्यकता है।
यह विषय केवल व्यापार तक सीमित नहीं है,
बल्कि यह भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता, MSME क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और करोड़ों रोजगारों की सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक और महत्वपूर्ण मुद्दा है।
भारत का कपड़ा क्षेत्र लगभग 10 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है। यदि पारंपरिक व्यापारी वर्ग पीछे रह गया, तो इसका सीधा असर हमारे उत्पादन, निर्यात और राष्ट्रीय आय पर पड़ेगा।
आपसे विनम्र आग्रह है कि इस विषय को प्राथमिकता देते हुए एक समर्पित राष्ट्रीय नीति पर विचार किया जाए, ताकि पारंपरिक व्यापारी भी डिजिटल भारत की मुख्यधारा में मजबूती से जुड़ सकें।
सादर,चम्पालाल बोथरा
राष्ट्रीय चेयरमैन – टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्मके खिलाफ सूरत से संवाददाता राजेंद्र तिवारी के साथ नरेंद्र प्रताप सिंह कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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