गुजरात प्रदेश के गन्ना मिलों एवम् गन्ना किसानों के विभिन्न समस्याओं को लेकर चिंतन बैठक का आयोजन

गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

गुजरात प्रदेश में सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज से चीनी मिल मालिकों और किसानों की नींद उड़ी, गांव-गांव में राजनीतिक सभाओं में किसानों के तीखे सवाल

जिला और तालुका पंचायत चुनावों में शुगर और सुुमुुल के मामले में सत्ताधारी दल के उम्मीदवारों को जवाब देना भारी पड़रहा

गुजरात प्रदेश सूरत जिले के चीनी नियामक (Sugar Commissioner), जिला रजिस्ट्रार और चीनी मिलों के प्रबंध निदेशकों के साथ आयोजित दो दिवसीय बैठक के बाद दक्षिण गुजरात की चीनी मिलों की वर्तमान स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

जिला और तालुका पंचायत के चुनाव में शुगर और सुमुल डेयरी के मामले में सत्ताधारी पक्ष के उम्मीदवारों को जवाब देना भारी पड़ेगा। ऐसी रिपोर्टों के बाद सरकार हरकत में आई है। स्थिति का आकलन करने के लिए एक चिंतन बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें चीनी नियामक (Sugar Commissioner) ने चीनी मिलों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को बुलाया था और चुनाव को आगे बढ़ाने के निर्णय पर उनकी राय ली।

चर्चा के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है कि यदि एक सामान्य किसान अपनी आजीविका के लिए कार्यक्षेत्र की चीनी मिलों की वर्तमान स्थिति के बारे में राज्य सरकार को सूचित करता है, तो सरकार मदद के लिए तैयार है।

मुख्य मुद्दा

किसानों के बीच यह भावना व्यक्त की गई है कि उनके द्वारा चुने गए नेताओं और अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हृदय पूर्वक (दिल से) प्रयास नहीं किए हैं। जागरूक किसानों और किसान संगठनों के नाम पर सोशल मीडिया में वायरल हुए एक संदेश ने दक्षिण गुजरात की शुगर फैक्ट्रियों (चीनी मिलों) में हड़कंप मचा दिया है। गाँव-गाँव में आयोजित होने वाली राजनीतिक बैठकों और कार्यक्रमों में गन्ना उगाने वाले किसानों और पशुपालकों द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों से सीधे सवाल पूछे जा रहे हैं, जिसके कारण राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है।

किसानों के बीच ऐसी चर्चा है कि वर्तमान में एक शुगर फैक्ट्री के डायरेक्टर सूरत जिले के मौजूदा विधायक हैं और कई अन्य डायरेक्टर विभिन्न संगठनों तथा पंचायती राज व्यवस्था के वरिष्ठ नेता हैं। सरकार में प्रतिनिधित्व होने के बावजूद, गन्ना किसानों की दयनीय स्थिति को राज्य सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और उचित सहायता प्राप्त करने में वे विफल रहे हैं, ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।”

मुख्य बातें:

* विषय: दक्षिण गुजरात के गन्ना किसानों में व्याप्त असंतोष।

* मुद्दा: सोशल मीडिया संदेशों के कारण राजनीतिक गरमाहट और निर्वाचित प्रतिनिधियों से जवाबदेही की मांग।

* आरोप: राजनेताओं (विधायक और वरिष्ठ नेताओं) के शुगर फैक्ट्री के डायरेक्टर होने के बावजूद किसानों को सरकारी लाभ दिलाने में विफलता दिखाई दे रही है जिससे किसान नेता काफी हद तक नाराज दिखाई दे रहे हैं

 

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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