संयुक्त अभियान में मथुरा वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने सांभर हिरण को सुरक्षित बचाया और स्थानांतरित किया

संवाददाता अर्जुन रौतेला। मथुरा के गोवर्धन रेंज के लोरियापट्टी गांव से एक नर सांभर हिरण को त्वरित संयुक्त अभियान के बाद सुरक्षित रूप से बचाकर दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। वयस्क सांभर को गांव के अंदर घूमते हुए देखा गया, जिसके बाद चिंतित स्थानीय लोगों ने तुरंत पास के वन विभाग को इसकी सूचना दी।

गांव में एक विशाल सांभर हिरण को घूमते देख भयभीत लोग तुरंत पास के वन विभाग के अधिकारियों को सूचित करने दौड़े, जिन्होंने 24×7 आपातकालीन हेल्पलाइन (+91 9917109666) के माध्यम से वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट को इसकी सूचना दी। बिना किसी देरी के, एक पशु चिकित्सक और प्रशिक्षित बचाव कर्मियों सहित छह सदस्यीय वाइल्डलाइफ एसओएस टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची।

जानवर को सुरक्षित रूप से पकड़ने के बाद, टीम ने मौके पर ही उसका गहन चिकित्सा परीक्षण किया और पाया कि सांभर काफी थका हुआ था और उसके पिछले हिस्से में खरोंच लगने की चोटें थीं। उसकी हालत स्थिर करने के लिए तुरंत प्राथमिक उपचार और आवश्यक इलाज किया गया। इसके बाद, हिरण को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में ले जा कर वापस छोड़ दिया गया, जिससे जानवर और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

मथुरा के डीएफओ, वेंकट श्रीकर पटेल आई.एफ.एस, ने कहा, “ग्रामीणों द्वारा वक़्त रहते दी गई सूचना पर वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस दोनों ने स्थिति पर सुचारू रूप से प्रतिक्रिया दी। ऐसा सहयोग मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि घायल वन्यजीवों को समय पर सहायता और सर्वोत्तम संभव देखभाल मिलती रहे।”

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “स्थानीय लोगों और वन विभाग से मिली समय पर जानकारी ने हमारी टीम को तुरंत कार्रवाई करने और हिरण को आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई। यह बचाव अभियान वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में लोगों की जागरूकता और त्वरित कार्रवाई के महत्व को उजागर करता है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक, डॉ. इलयाराजा एस ने बताया, “जांच करने पर सांभर काफी थका हुआ पाया गया और उसके पिछले हिस्से में खरोंच लगने की चोटें थीं, जो संभवतः गांव में घूमते समय लगी होंगी। चोटों का इलाज करने और जानवर के तनाव को कम करने के लिए मौके पर ही तत्काल उपचार किया गया।”

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने कहा, “लगातार कम होते जंगल और भोजन एवं पानी की तलाश में सांभर हिरण अक्सर मानव-प्रधान क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं। सांभर को अधिक चोट से बचाने और उसके तनाव को कम करने के लिए उसको सुरक्षित वातावरण में स्थानांतरित करना आवश्यक था।”

सांभर हिरण (रूसा यूनिकलर) भारत में पाई जाने वाली सबसे बड़ी हिरण प्रजातियों में से एक है और इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित किया गया है। आई.यू.सी.एन की रेड लिस्ट में इसे ‘वल्नरेबल’ श्रेणी में रखा गया है और यह मुख्य रूप से जंगलों और घास के मैदानों में निवास करते हैं। हालांकि, प्राकर्तिक आवास के नुकसान और बढ़ते मानवीय अतिक्रमण के कारण अक्सर इन्हें मानव बस्तियों में शरण लेनी पड़ती है।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला आगरा 8868868461

Follow us on →     
No Slide Found In Slider.

Updated Video
 
gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

    Related Posts

    गुजरात प्रदेश सुरत शहर पांडेसरा इंडस्ट्रियल संगठन के सहयोग से पांडेसरा जीआईडीसी पुलिस स्टेशन के आला अधिकारियों द्वारा होली के पावन पर्व के अवसर पर गरीब परिवार के बच्चों के साथ मनाई रंग बिरंगी होली

    गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट गुजरात प्रदेश सुरत शहर के पांडेसरा पुलिस स्टेशन विस्तार में आज पांडेसरा इंडस्ट्रियल संगठन के सहयोग से होली महा पावन पर्व पर खाकी…

    गुजरात प्रदेश सुरत शहर में ट्राफिक समस्या के समाधान हेतु सुरत शहर ट्राफिक पुलिस और सुरत महानगर पालिका की टीम उतरी मैदान में

    गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट गुजरात प्रदेश सूरत शहर में ट्रैफिक की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। खासकर वराछा, कतारगाम और पांडेसरा जैसे व्यस्त इलाकों में अवैध…

    Leave a Reply