बचाए गए हाथियों और भालुओं ने लज़ीज़ उपहारों के साथ मनाया क्रिसमस

संवाददाता अर्जुन रौतेला। वाइल्डलाइफ एसओएस ने आगरा और मथुरा स्थित अपने केंद्रों में क्रिसमस मनाया, जिससे बचाए गए हाथी और भालुओं और उनकी देखभाल करने वालों के बीच खुशी और उत्सव का माहौल फैल गया। क्रिसमस के रंगों में लिपटे उपहारों और खूबसूरती से सजाए गए उनके बाड़ों ने इसे और यादगार बना दिया, जिससे सभी बचाव केंद्रों में आनंदमय वातावरण छा गया।

केंद्रों में, पेड़ों को घंटियों और सितारों से सजाया गया, जहाँ सांता क्लॉज़ के वेश में देखभाल करने वाले कर्मचारी वहां रहने वाले जानवरों के साथ उत्सव में शामिल हुए। पॉपकॉर्न, मूंगफली, खजूर, नारियल और शहद से भरे रहस्यमयी बक्से आश्चर्यजनक रूप से रखे गए, जो जानवरों की जिज्ञासा और भोजन खोजने के व्यवहार को प्रोत्साहित करते हैं।

हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में, माया, फूलकली, एम्मा, तारा और सूरज हाथियों ने शाम की सैर के दौरान क्रिसमस के जश्न में भाग लिया। रंग-बिरंगे फलों की दावत और सावधानीपूर्वक लपेटे गए सरप्राइज बॉक्स तैयार किए गए, जिनमें पौष्टिक पसंदीदा खाद्य पदार्थ भरे गए थे, जिससे हाथियों को बेहद खुशी मिली। क्रिसमस हाथी अस्पताल परिसर में भी मनाया गया, जहाँ हथिनी बानी को क्रिसमस के लिए विशेष उपहार दिए गए, जिसका उसने बड़े उत्साह से आनंद लिया। लपेटे हुए सरप्राइज बॉक्स, सजी हुई फलों की थालियाँ और सोच-समझकर तैयार किए गए उपहारों ने यह सुनिश्चित किया कि जश्न मनोरंजक और हाथियों के कल्याण पर केंद्रित रहे।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “त्योहारी गतिविधियों के माध्यम से हम बचाए गए जानवरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ उनके लिए एक स्नेहपूर्ण वातावरण भी तैयार कर पाते हैं। यह जिम्मेदार पशु देखभाल का ही एक विस्तार है।”

आगरा भालू संरक्षण केंद्र में रहने वाले स्लॉथ भालू मोगली, रॉन, मौली, डिजिट, गंभीर और वाल्मीकि अपने बाड़ों के अंदर रखे गए आश्चर्यजनक सरप्राइज बक्सों को देखकर बहुत खुश हुए। शहद, खजूर और पॉपकॉर्न की खुशबू ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया। उनकी सहज प्रवृत्ति और पसंद के हिसाब से तैयार किए गए ये उपहार बक्से उन्हें प्रोत्साहित करते हैं।

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, “ये जश्न जितना जानवरों के लिए हैं, उतने ही उनके देखभालकर्ताओं के लिए भी हैं जो हर दिन उनकी सेवा में लगे रहते हैं। ये दोनों ही हमारे काम का अभिन्न अंग हैं। दैनिक देखभाल और विश्वास के माध्यम से बना उनका बंधन ही हमारे हर लक्ष्य का आधार है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने कहा, “ऐसी गतिविधियाँ पशु कल्याण को संवर्धन-आधारित देखभाल के साथ एकीकृत करने पर हमारे ध्यान को उजागर करता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बचाए गए जानवरों को त्योहारी मौसम के दौरान आराम और देखभाल मिले।”

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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