गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश सुरत शहर के वेड रोड विस्तार के नासिर नगर ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, राज्य सरकार, सूरत महानगरपालिका और पुलिस से मांगा जवाब
सूरत, 9 जुलाई। नासिरनगर ध्वस्तीकरण मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, सूरत महानगरपालिका (एसएमसी) और सूरत पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने मानसून के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को बेघर किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि 150 से अधिक शिकायतें मिलने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना गंभीर विषय है। अदालत ने अधिकारियों से सवाल किया कि केवल जांच पर जांच करने से काम नहीं चलेगा और जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।
महानगरपालिका की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर भी अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर हुई कार्रवाई से नगर आयुक्त अनभिज्ञ नहीं हो सकते। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
सरकार द्वारा क्षेत्र में बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी संबंधी दलील पर भी हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि केवल सीमांकन (डिमार्केशन) करना था तो इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती क्यों की गई।
मानसून के बीच बेघर हुए प्रभावित परिवारों को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने उनके पुनर्वास (आवास) की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही नगर आयुक्त की पूर्व रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए विस्तृत शपथपत्र (एफिडेविट) और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) 9 जुलाई तक प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है।
हाईकोर्ट की इन सख्त टिप्पणियों को प्रशासनिक जवाबदेही और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट
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