नौ फ़ुट लंबा मगरमच्छ भटककर गाँव में पहुँचा, वाइल्डलाइफ़ एसओएस ने सुरक्षित पकड़ा

संवाददाता अर्जुन रौतेला। उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले के मकसूदपुर गाँव में आधी रात को एक आपातकालीन स्थिति पैदा हुई, जब पास की सिंचाई नहर से लगभग 9 फ़ीट लंबा मगरमच्छ निकलकर गाँव में घुस आया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। रात करीब 2:00 बजे ‘वाइल्डलाइफ़ SOS रैपिड रिस्पॉन्स टीम’ को आपातकालीन सूचना दी गई।

खास बचाव उपकरणों का इस्तेमाल करके, टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से काबू में किया। तड़के सुबह चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में मगरमच्छ को कोई चोट नहीं आई और वह शारीरिक रूप से स्वस्थ पाया गया। स्वास्थ्य की जांच के बाद, टीम ने विशालकाय मगरमच्छ को इंसानी बस्तियों से दूर, उसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।

वाइल्डलाइफ़ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित होने के कारण, भारत में मगरमच्छों को सबसे ज़्यादा कानूनी सुरक्षा मिलती है। मॉनसून में पानी का स्तर बढ़ने से अक्सर जलमार्ग, नहरें और नदियाँ आपस में जुड़ जाती हैं, जिससे मगरमच्छ गाँवों और अनजान इलाकों में पहुँच जाते हैं। हालाँकि ऐसी घटनाएं चौंकाने वाली हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर मगरमच्छ लोगों के लिए खतरा पैदा करने के बजाय पानी में वापस जाने का सुरक्षित रास्ता तलाश रहे होते हैं।

वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “मानसून के महीनों में अक्सर जंगली जानवर इंसानी बस्तियों के ज़्यादा करीब आ जाते हैं, क्योंकि पानी का स्तर बढ़ने से उनकी स्वाभाविक आवाजाही बदल जाती है। ऐसे हालात में, लोगों के लिए ज़रूरी है कि वे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचित करें। स्थानीय निवासियों और हमारी रेस्क्यू टीम द्वारा समय पर की गई कार्रवाई और सहयोग की वजह से यह रेस्क्यू सुरक्षित रूप से पूरा हुआ।”

वाइल्डलाइफ़ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, “मगरमच्छों की स्वस्थ आबादी मीठे पानी के फलते-फूलते इकोसिस्टम का एक अहम संकेत है। इन जानवरों को पकड़ने, काबू करने या उनके आस-पास भीड़ लगाने की कोशिश से लोगों और वन्यजीवों, दोनों को ही बेवजह खतरा होता है, जबकि लंबे समय तक तनाव जानवर की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है।”

वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर, बैजू राज एम.वी. ने कहा, “अच्छी बात यह रही कि मगरमच्छ को कोई चोट नहीं आई और उसे बिना किसी देरी के वापस उसके प्राकर्तिक आवास में छोड़ा जा सका। मॉनसून के दौरान ऐसे जानवरों के दिखने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि लोग ऐसी घटनाओं की जानकारी तुरंत हमारे हेल्पलाइन नंबर +91-99171 09666 पर दें।”

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

Follow us on →     
No Slide Found In Slider.

Updated Video
 
gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

    Related Posts

    गुजरात प्रदेश सुरत शहर के सचिन विस्तार से भगवान् श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा+++++++

    टी एन न्यूज़ 24 गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट 16 जुलाई को सचिन में निकलेगी भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील श्री…

    अवैध तोड़फोड़ करने वाले नगर निगम अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पीड़ित परिवार ने लगाई गुहार

    अर्जुन रौतेला आगरा। विगत सप्ताह नगर निगम द्वारा नॉर्थ विजयनगर कॉलोनी में एक संपत्ति पर की गई तोड़फोड़ को अवैध और अन्याय पूर्ण बताते हुए पीड़ित परिवार ने प्रेस वार्ता…

    Leave a Reply