गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह के इस्तीफे और बयान से पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर छिड़ी बहस
नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह द्वारा समाचार चैनल NEWS24 से इस्तीफा देने के बाद पत्रकारिता की स्वतंत्रता और मीडिया की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस्तीफे के लगभग 27 दिन बाद सोशल मीडिया पर लाइव आकर उन्होंने अपने निर्णय के पीछे के कारणों और पत्रकारिता से जुड़े अनुभवों को साझा किया।
गरिमा सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों तक उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ सरकार से सवाल पूछे, लेकिन एक समय ऐसा आया जब उन्हें लगा कि अब पहले जैसी स्वतंत्रता और क्षमता के साथ सत्ता से सवाल करना संभव नहीं रह गया है। इसी कारण उन्होंने चैनल से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता से सवाल पूछना और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। यदि पत्रकार स्वतंत्र रूप से प्रश्न नहीं पूछ पाएंगे, तो इसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में सत्ता से सीधे सवाल पूछने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
गरिमा सिंह के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोगों ने उनके निर्णय का समर्थन किया है, वहीं कुछ लोगों ने उनके विचारों से असहमति भी जताई है।
फिलहाल, गरिमा सिंह के बयान को लेकर राजनीतिक और मीडिया जगत में चर्चा तेज है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता, मीडिया की निष्पक्षता और लोकतंत्र में प्रेस की भूमिका पर नई बहस को जन्म दिया है।
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट
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