गुजरात प्रदेश सूरत शहर में साप्ताहिक अवकाश और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर मजदूरों का आंदोलन, मजदूर नेताओं सहित कई श्रमिक हिरासत में
पांडेसरा पुलिस की कार्रवाई पर मजदूर नेता शान खान ने जताया विरोध; मजदूरों ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान
**सूरत, 15 अक्टूबर 2026:** सूरत की एम्ब्रॉयडरी इकाइयों में कार्यरत मजदूरों को साप्ताहिक अवकाश देने और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आज मजदूरों द्वारा महाआंदोलन एवं सत्याग्रह का आयोजन किया गया था मजदूर अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचने वाले थे, लेकिन आंदोलन शुरू होने से पहले ही पुलिस ने मजदूर संगठनों के नेताओं सहित कई श्रमिकों को हिरासत में ले लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पांडेसरा पुलिस ने राष्ट्रीय मजदूर सेना के अध्यक्ष सुरेश सोनवणे, सूरत संघर्ष लेबर यूनियन के अध्यक्ष रमाकांत पांडे, सार्वजनिक मजदूर एकता यूनियन के अध्यक्ष मलखानसिंह वर्मा, सीजेपी सदस्य संदीप पटेल तथा मजदूर नेता विनय पाठक सहित अन्य श्रमिकों के खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मजदूरों में नाराजगी देखी गई।
कुछ मजदूर कलेक्टर कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर अपने नेताओं का इंतजार करते रहे। वहीं, पुलिस ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए मजदूरों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की। इस दौरान कुछ श्रमिक पुलिस से बचने के लिए भागे, जबकि कुछ को पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ लिया। कई मजदूरों को पुलिस वैन में बैठाकर ले जाया गया।
मजदूर नेता शान खान ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि सूरत में अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की जायज मांगों और उनकी आवाज को इस तरह दबाया नहीं जा सकता। मजदूरों का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
दूसरी ओर, डीसीपी राजेश परमार के अनुसार, मजदूरों के विरोध कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने बताया कि कलेक्टर कार्यालय से लगभग 100 मीटर पहले 60 से 70 मजदूरों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम के लिए निर्धारित शर्तें पूरी नहीं होने के कारण अनुमति नहीं दी गई थी और कलेक्टर कार्यालय के आसपास पर्याप्त पुलिस बंदोबस्त किया गया था।
मजदूर संगठनों की प्रमुख मांग है कि एम्ब्रॉयडरी इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों को नियमित साप्ताहिक अवकाश दिया जाए तथा उनके वेतन में उचित वृद्धि की जाए।
**मजदूर संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक मजदूरों की आवाज बुलंद करने का संघर्ष जारी रहेगा।*
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