आगरा में एक माह में आठ गर्भवती महिलाओं तो 14 शिशुओं की मौत हो गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की व्यस्थाएं बदहाल नजर आ रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि सरकारी योजनाएं कैसें परवान चढ़ेंगी ?
उत्तर प्रदेश के आगरा में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव के दौरान गर्भवतियों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा। अप्रैल माह में आठ गर्भवतियों ने दम तोड़ दिया। ये स्थिति तब है जब शत-प्रतिशत प्रसव सिजेरियन कराने के आदेश हैं। वहीं इसी माह में 14 शिशुओं की भी मौत ने चिंता में डाल दिया है।
जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल की अध्यक्षता में बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह खुलासा हुआ। अप्रैल माह में फतेहपुर सीकरी में दो, एसएन मेडिकल कॉलेज में चार, अकोला और जैतपुर में एक-एक गर्भवती की मृत्यु हो गई। डीएम ने इस पर नाराजगी जाहिर की। बताया गया कि मातृ मृत्यु के संभावित कारण खून की कमी, हार्ट फेल होना आदि रहे। एसएन मेडिकल कॉलेज में अप्रैल माह में 14 शिशुओं की भी मौत हुई। डीएम ने इस संबंध में एसएन मेडिकल कॉलेज प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा।
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