पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है, जो कि भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन अमावस्या तक चलता है. 15 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष की शुरुआत इस बार 7 सितंबर से हो रही है, जिसका समापन 21 सितंबर को होगा. यह अवधि पितरों को समर्पित मानी गई है और इस दौरान श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में के दौरान पूर्वज किसी न किसी रूप में अपने वंशजों के घर पधारते हैं. अक्सर लोग पितरों के इन रूपों को नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में हम आपको बताएंगे कि पितर किस रूप में घर आते हैं.
पितर किस रूप में आते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान पितर कौआ, चींटियों, गायों और कुत्तों जैसे जीवों के रूप में धरती पर आते हैं, जिससे वे अपने वंशजों से श्राद्ध और भोजन ग्रहण कर सकें. पितृ पक्ष के दौरान ऐसे जीवों का आपके घर आना और भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है. यह पूर्वजों की कृपा और आशीर्वाद का संकेत होता है.
कौए:- धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितर कौओं के रूप में पृथ्वी पर आते हैं और जल-अन्न ग्रहण करते हैं. कहते हैं कि पितृ पक्ष में कौओं को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है.
चींटियां:- पितृ पक्ष के दौरान घर में बहुत सारी लाल चींटियों का दिखना भी पितरों के आने का संकेत हो सकता है. अगर पितृ पक्ष में आपको घर में लाल चींटियां दिखें तो उन्हें आटा खिलाना चाहिए.
गाय और कुत्ता:- पितृ पक्ष के दौरान गाय और कुत्ते के रूप में पितरों का घर के द्वार पर आना शुभ माना जाता है. गाय और कुत्ते को खाना खिलाने से पितृगण प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है.
धर्म शास्त्रों के अनुसार, पितर मनुष्य से लेकर पशु-पक्षी तक कई रूपों में आपके घर पर आ सकते हैं, इसलिए पितृ पक्ष के दौरान किसी भी जीव को आते देखें तो उन्हें खाना खिलाना चाहिए.
क्यों आते हैं पितर?
ज्योतिष के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान पितर अपने वंशजों से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के माध्यम से अन्न-जल ग्रहण करने आते हैं. ऐसा माना जाता है कि पितरों को तृप्त करने से वे अपने वंशजों को खुशहाली और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. कहते हैं कि जिन लोगों के पितर तृप्त नहीं रहते हैं तो वे श्राप देते हैं, जिससे पितृ दोष लगता है. ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान इन रूपों को भोजन कराने से पितृ दोष से बचा जा सकता है।
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