जावरा, रतलाम (मध्यप्रदेश)।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में जावरा नगर में भव्य विजयदशमी उत्सव का आयोजन किया गया। यह आयोजन नगर के काटजू मंडी स्थित खचरौद नाका पर सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नगर के सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पथ संचलन कर समाज में अनुशासन, एकता और संगठन का संदेश दिया। पथ संचलन नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए भगत सिंह कॉलेज चौपाटी पर समापन हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और परिचय के साथ हुआ, जिसे नगर कार्यवाह आकाश भावसार ने प्रस्तुत किया। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया (माननीय नगर संघचालक, जावरा), श्री राम जी चंचलानी (प्रख्यात उद्योगपति, जावरा) और विनय जी पिंगले (इंदौर) उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता के रूप में विनय जी पिंगले ने स्वयंसेवकों और नगरवासियों को संबोधित करते हुए अपने बौद्धिक में ऐतिहासिक दृष्टिकोण और संगठन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत भूमि पर मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक सभी विदेशी आक्रांताओं ने हिंदू समाज की एकता को तोड़ने का प्रयास किया। विशेषकर अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा पद्धति पर गहरा आघात पहुंचाया, जिससे समाज की जड़ों को कमजोर करने की कोशिश की गई।
उन्होंने बताया कि कठिनाइयों और चुनौतियों के बीच भी हिंदू समाज ने वर्षों तक धैर्य और सहनशीलता का परिचय दिया। इसी परिप्रेक्ष्य में संघ के संस्थापक परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी ने समाज की बिखरी शक्तियों को एकत्र करने का संकल्प लिया। उन्होंने संगठन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी और प्रत्येक हिंदू को संगठित करने का कार्य किया।
विनय जी पिंगले ने अपने उद्बोधन में ‘पंच परिवर्तन’ की संकल्पना को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि संघ संगठन का उद्देश्य केवल स्वयंसेवकों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। यह पंच परिवर्तन शिक्षा, संस्कृति, समाज जीवन, राष्ट्रभक्ति और आत्मनिर्भरता के आयामों से जुड़ा हुआ है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नगरवासी, समाजसेवी, उद्योगपति, विद्यार्थी और स्वयंसेवक उपस्थित रहे। उत्सव का वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण रहा। पथ संचलन के दौरान नगरवासी मार्गों पर खड़े होकर स्वयंसेवकों का स्वागत करते रहे और पुष्पवर्षा कर कार्यक्रम की भव्यता को बढ़ाया।
अंत में संघचालक और अन्य गणमान्य अतिथियों ने विजयदशमी के इस पर्व को केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया। सभी ने आह्वान किया कि समाज को संगठित और सशक्त बनाने के लिए हर नागरिक को अपना योगदान देना चाहिए।
इस भव्य आयोजन के सफल संचालन में नगर के स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ।
रिपोर्टर – श्याम राठौर
जावरा, जिला रतलाम (मध्यप्रदेश)
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