इंटरनेशनल स्टेज निर्देशक कैरोलिन क्लेग ने वालंटियर बन वन्यजीव संरक्षण का किया समर्थन

अर्जुन रौतेला आगरा। प्रशंसित अंतरराष्ट्रीय स्टेज निर्देशक और वाइल्डलाइफ एसओएस की लंबे समय से समर्थक रहीं कैरोलिन क्लेग ने हाल ही में आगरा और मथुरा में संस्था के संरक्षण केंद्रों में तीन दिवसीय स्वयंसेवी कार्य पूरा किया।

वाइल्डलाइफ एसओएस के केंद्रों का पहली बार दौरा करते हुए, कैरोलिन ने आगरा भालू संरक्षण केंद्र, हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र और हाथी अस्पताल परिसर में टीम के साथ मिलकर काम किया और भालू और हाथियों को बचाने और उनकी रक्षा करने के संस्था के मिशन की गहन समझ हासिल की।

लगभग एक दशक से वाइल्डलाइफ एसओएस के कार्यों का समर्थन करते हुए, उन्होंने भालू और हाथी की देखभाल के बारे में जाना और विभिन्न केंद्रों में स्वयंसेवक गतिविधियों में भाग लिया। आगरा भालू संरक्षण केंद्र में, कैरोलिन ने देखभालकर्ताओं के साथ बाड़ों की सफाई जैसे कार्यों में सहायता की और बचाए गए स्लॉथ भालुओं की दैनिक दिनचर्या का अवलोकन किया। उन्होंने संस्था द्वारा पूर्व में ‘डांसिंग’ भालुओं का पुनर्वास और उन्हें आजीवन देखभाल प्रदान करने के तरीके को समझने के लिए कर्मचारियों के साथ बातचीत भी की।

इस दौरान उन्होंने हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में भी समय बिताया, जहाँ उन्होंने फल काटने, हाथियों के लिए गन्ना काटने और अन्य स्वयंसेवी गतिविधियों में भाग लिया, जो बचाए गए हाथियों की दैनिक देखभाल में सहायक होती हैं। कैरोलिन ने भारत के पहले हाथी अस्पताल का भी दौरा किया और दशकों की कैद से बचाए गए घायल, बीमार और वृद्ध हाथियों को प्रदान किए जाने वाले विशेष उपचारों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। उनके लिए एक बेहद खास पल हाथी माया, फूलकली, एम्मा और तारा के साथ शाम की सैर थी, जिसे उन्होंने भावनात्मक और सुकून देने वाला अनुभव बताया।

अपने अनुभव के बारे में बताते हुए कैरोलिन ने कहा, “यहां का मेरा अनुभव सचमुच जीवन बदल देने वाला रहा है। मैं जीवन भर जानवरों के संरक्षण के लिए अभियान चलाती रही हूं, लेकिन वाइल्डलाइफ एसओएस में जमीनी स्तर पर हो रहे काम को देखना ब्रिटेन की किसी संस्था का समर्थन करने से बिलकुल अलग है। टीम और देखभाल करने वालों का समर्पण, जुनून और संवेदनशीलता असाधारण है। मैं सभी से आग्रह करूंगी कि वे वाइल्डलाइफ एसओएस का दौरा करें, यह अद्भुत है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “कैरोलिन का समर्थन और हमारे साथ वालंटियर करने का उनका निर्णय संरक्षण के प्रति उनकी सच्ची प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनकी जिज्ञासा, विनम्रता और करुणा उनकी उपस्थिति के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दी l हम उन सभी समर्थकों के आभारी हैं, जो बदलाव लाने के हमारे लक्ष्य को समझते हैं।”

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, “कैरोलिन का हमारे केंद्रों पर स्वयंसेवक बनकर आना हमारे लिए बेहद खुशी की बात है। हमारे द्वारा बचाए गए जानवरों के बारे में सीखने और अपना योगदान देने की उनकी तत्परता वाकई सराहनीय थी। उनके जैसे समर्थकों का साथ हमारे काम को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करता है और भारत में वन्यजीवों के सामने आने वाली चुनौतियों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है।”

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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