बंगाल चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया की जैसी करनी वैसी भरनी जो बोएगा वही पाएगा

गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

बंगाल कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने क़रीब 29 साल पहले 1997 में कांग्रेस तोड़ कर मुकुल राॅय के साथ मिल कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बनाई तो उन्होंने CPM CPI और कांग्रेस को खत्म करने के लिए भाजपा की पश्चिम बंगाल में इंट्री कराई….

मुकुल रॉय बाद में भारतीय जनता पार्टी में चले गए। 1999 में ममता बनर्जी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार में शामिल हो गईं और रेल मंत्री बन गईं।

2001 की शुरुआत में जब आपरेशन वेस्ट एंड के ज़रिए रक्षा सौदों में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ तो ममता एनडीए की सरकार से अलग हो गईं।

अगस्त 2001 में बीबीसी के एक इंटरव्यू में जब ममता से पूछा गया कि क्या उन की पार्टी के एनडीए में लौटने की कोई संभावना है तो उन्होंने जवाब दिया हां, टीएमसी के घोषणापत्र के मुताबिक भाजपा हमारी ‘स्वाभाविक सहयोगी’ है।

2003 में ममता फिर एनडीए की सरकार में शामिल हो गई, मगर कई महीने बिना विभाग की मंत्री रहीं।

2003 में ममता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य के तत्कालीन संपादक तरुण विजय की कम्युनिस्ट आतंकवाद पर लिखी गई पुस्तक के विमोचन समारोह में शिरकत की। तरुण विजय ने ‘बंगाल की दुर्गा’ कह कर उन का स्वागत किया।

भाजपा के राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज ने सदन में बोलते हुए ममता के लिए कहा कि ‘हमारी प्यारी ममता दी साक्षात दुर्गा हैं।’ पुंज का अभी पंद्रह दिन पहले निधन हुआ है।

आरएसएस ने भी ममता को ‘बंगाल की दुर्गा’ बताया और वामपंथियों के ख़िलाफ़ उन की लड़ाई के पक्ष में ‘ठोस समर्थन’ जताया।

ममता ने अपने एक भाषण में आरएसएस के मोहन भागवत, शेषाद्रि चारी और मदन दास देवी का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बहुत ज़्यादा नेताओं को तो नहीं जानती हूं, मगर उन में से कुछ से व्यक्तिगत तौर पर मिली हूं। आप लोग सच्चे देशभक्त हैं। मुझे मालूम है कि आप अपने देश से सच्चा प्यार करते हैं।’

2012 में आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य ने ममता बनर्जी की सादगीपूर्ण जीवनशैली की तारीफ़ करते हुए लेख लिखा। कहा कि ‘ममता उन बिरले राजनीतिकों में हैं, जिन्होंने राजनीति का इस्तेमाल पैसा कमाने के लिए नहीं किया। काश कि देश को ऐसे ज़्यादा-से-ज़्यादा राजनीतिक मिलें।’

2019 में ममता ने एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ बहुत-से आंदोलन किए। मगर जब सीएए पर संसद में मतदान हुआ तो टीएमसी के आठ सांसद रहस्यमयी तरीके से ग़ैरहाज़िर रहे और इस वज़ह से विधेयक पारित हो गया। ममता ने इन सांसदों को माफ़ी बख़्श दी। उन के खि़लाफऋ कोई कार्रवाई नहीं की।

27 जनवरी 2020 को जब भाजपा सरकार के तत्कालीन वित राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने भाषण में ‘गोली मारो सालों को’ के नारे लगवाए तो टीएमसी के नेता शेख आलम ने सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर मुर्शिदाबाद में गोलियां चला दीं।

2017 में भाजपा में चले गए मुकुल रॉय 2021 के विधानसभा चुनावों के पहले टीएमसी में वापस आ गए और ममता ने उन्हें खुशी-खुशी शामिल कर लिया। चुनावों के दौरान मुकुल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बीजेपी इज इक्वल टु टीएमसी।

जुलाई 2022 में टीएमसी ने उपराष्ट्रपति के चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा का साथ देने से इनकार कर दिया। बाद में टीएमसी के सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। एब्सटेन किया। जगदीप धनखड़ जीत गए। ममता ने उन धनखड़ की मदद की, जिन्होंने बंगाल का राज्यपाल रहते हुए उन का जीना हराम कर रखा था।

सितंबर 2022 में ममता ने आरएसएस की दिल खोल कर प्रशंसा की। कहा कि संघ में बहुत-से बड़े अच्छे लोग हैं। संघ अच्छा संगठन है।

और इस तरह BJD , BSP, SS , JDU, TRS, YSR, PDP के बाद TMC को वही अजगर खा गया…..

ममता बनर्जी जो बोईं वहीं काट रहीं हैं, इंडिया गठबंधन तोड़ कर उन्होंने जो बोया वही काट रहीं हैं। अब उनकी पार्टी के सांसदों का राघव चड्ढा होना तय है

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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