संवादाता अर्जुन रौतेला आगरा। एक ओर भारत सरकार और प्रदेश सरकार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने संकल्प को निरंतर दोहरा रही है, वहीं भारत सरकार के नेक इरादों को कुछ अस्पताल और डॉक्टर्स पलीता लगाने में भी लगे हैं। ताजा मामला आगरा के केपी मेडिकल इंस्टिट्यूट से जुड़ा है।
मरीज के पीड़ित परिजन सेवानिवृत्त वरिष्ठ जिला अधीक्षक शिव प्रकाश यादव ने बताया कि उनके ससुर साहब श्री सुरेंद्र सिंह यादव (सीनियर सिटीजन) हार्ट अटैक के कारण जीवन-मौत से जूझ रहे थे। उनका इलाज आगरा के केपी मेडिकल इंस्टिट्यूट में चल रहा था। मरीज को सुधार भी हो रहा था कि तभी अस्पताल द्वारा भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैशलेस उपचार देने से इनकार करने के बाद मरीज को डॉक्टर हिमांशु यादव द्वारा जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि पीएम-जेएबाई के नियमों के अंतर्गत कोई भी संबद्ध अस्पताल हार्ट अटैक जैसे मामलों में आपदा उपचार से इनकार नहीं कर सकता। इसलिए यह आयुष्मान भारत योजना की गाइडलाइंस के घोर उल्लंघन, भारतीय कानून के तहत आपदा चिकित्सा देखभाल से इनकार करने, चिकित्सा क्षेत्र में अनैतिक अभ्यास करने और एक वरिष्ठ नागरिक के साथ दुर्व्यवहार और उसकी जान को जोखिम में डालने वाला अमानवीय, अवैध और निंदनीय कृत्य है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री/स्वास्थ्य मंत्री श्री बृजेश पाठक, मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, भारत सरकार के साथ-साथ आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और आईएमए के सचिव को पत्र व ईमेल के माध्यम से शिकायत करते हुए केपी मेडिकल इंस्टिट्यूट के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्यवाही करते हुए अस्पताल व डॉ. हिमांशु यादव की मान्यता रद करने की अपील की है ताकि भविष्य में फिर कोई अस्पताल या चिकित्सक ऐसा अमानवीय कृत्य न कर सकें।
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