पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डीएसपी मुख्यालय ने संभाली कमान, सुरक्षा बलों को दिए बिना फ्रिस्किंग एंट्री न देने के सख्त निर्देश।
पाकुड़: जिला व्यवहार न्यायालय (सिबल कोर्ट) और माननीय न्यायाधीशों के आवासीय परिसर (जज कॉलोनी) की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए पाकुड़ पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। सोमवार, 8 जून 2026 को पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह के कड़े निर्देश पर कोर्ट सुरक्षा नोडल पदाधिकारी-सह-पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) द्वारा एक विस्तृत और सघन सुरक्षा जांच अभियान चलाया गया।
इस औचक निरीक्षण और सुरक्षा समीक्षा के दौरान परिचारी प्रवर, पुलिस केंद्र और कोर्ट सुरक्षा प्रभारी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। अधिकारियों की टीम ने पूरे न्यायालय परिसर का चप्पा-चप्पा छाना और सुरक्षा उपकरणों की क्रियाशीलता की बारीकी से जांच की।
आधुनिक उपकरणों और फ्रिस्किंग व्यवस्था की समीक्षा
जांच टीम ने न्यायालय परिसर के भीतर और आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की मॉनिटरिंग स्थिति को देखा। इसके साथ ही प्रवेश द्वारों पर लगाए गए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) और हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर (HHMD) की कार्यक्षमता को भी परखा गया, ताकि तकनीक के स्तर पर सुरक्षा में कोई चूक न रह जाए।
डीएसपी मुख्यालय ने कोर्ट हाजत, कैदी एस्कॉर्ट वाहन और मुख्य द्वारों पर तैनात जवानों द्वारा की जा रही फ्रिस्किंग (सघन शारीरिक तलाशी) की ऑन-स्पॉट समीक्षा की। उन्होंने जवानों की सतर्कता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय, झारखंड, रांची द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
सुरक्षा को लेकर जारी किए गए ये मुख्य निर्देश:
सुरक्षा की समीक्षा करने के बाद कोर्ट सुरक्षा नोडल पदाधिकारी ने प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को ऑन-ड्यूटी विशेष सतर्कता बरतने के लिए निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:
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बिना सघन तलाशी के प्रवेश पूरी तरह वर्जित: ड्यूटी पर तैनात सभी अधिकारियों और जवानों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि बिना मुकम्मल फ्रिस्किंग (सघन तलाशी) के किसी भी व्यक्ति (चाहे वह कोई भी हो) को न्यायालय परिसर के भीतर कदम नहीं रखने दिया जाए।
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प्रतिबंधित सामग्रियों पर पैनी नजर: तलाशी के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने साथ आग्नेयास्त्र (हथियार), ज्वलनशील वस्तुएं, नुकीली वस्तुएं या अन्य किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित सामग्री लेकर परिसर में प्रवेश न कर पाए।
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कैदी एस्कॉर्ट को विशेष सतर्कता के निर्देश: जेल से बंदियों को कोर्ट लाने और वापस ले जाने के दौरान कैदी एस्कॉर्ट में तैनात पुलिस बल को अत्यधिक संवेदनशील और सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि पारगमन (ट्रांजिट) के दौरान सुरक्षा का कोई संकट न खड़ा हो।
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संतरी पोस्ट खाली छोड़ने पर होगी कार्रवाई: न्यायालय परिसर और ज्यूडिशियल कॉलोनी (न्यायाधीशों के आवासीय परिसर) की सुरक्षा में तैनात जवानों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई है कि किसी भी परिस्थिति में या किसी भी बहाने से संतरी पोस्ट को खाली नहीं छोड़ा जाना चाहिए। चौबीसों घंटे पोस्ट पर जवानों की सक्रिय तैनाती अनिवार्य है।
पाकुड़ पुलिस प्रशासन के इस कड़े रुख से साफ है कि न्यायिक परिसर और न्यायाधीशों की सुरक्षा के मामले में किसी भी स्तर पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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