गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
सरकारी स्कूलों में बढ़ते शैक्षणिक स्तर के संकट पर गंभीर चिंतागुजरात सरकार एक ओर राज्यभर में प्रवेशोत्सव और शिक्षा महोत्सव का आयोजन कर रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम संचालित विद्यालयों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर सामने आए तथ्य अत्यंत चिंताजनक हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अहमदाबाद और सूरत नगर निगम स्कूलों में प्रति विद्यार्थी हजारों रुपये का वार्षिक खर्च किया जा रहा है। अहमदाबाद में एक विद्यार्थी पर लगभग 67 हजार रुपये तथा सूरत में लगभग 55 हजार रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद कक्षा 6 से 8 तक के अनेक विद्यार्थी सामान्य गुजराती पाठ भी पढ़ने में असमर्थ पाए गए हैं।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि कई विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे सामान्य गणितीय प्रश्नों का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
शिक्षकों पर शैक्षणिक कार्यों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बढ़ता बोझ भी विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप विद्यार्थियों के बुनियादी शैक्षणिक कौशल कमजोर होते जा रहे हैं।
यह भी अत्यंत चिंताजनक है कि कुछ परिवारों के बच्चे आज भी विद्यालय से बाहर हैं तथा उन्हें शिक्षा के अधिकार का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
हम राज्य सरकार, शिक्षा विभाग, नगर निगम स्कूल बोर्ड तथा संबंधित अधिकारियों से मांग करते हैं कि:
1. विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का विशेष मूल्यांकन किया जाए।
2. कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक अभियान चलाया जाए।
3. शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए।
4. विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान कर उन्हें तत्काल शिक्षा से जोड़ा जाए।
5. शिक्षा पर होने वाले खर्च और उसके परिणामों की जवाबदेही तय की जाए।
शिक्षा केवल बजट और योजनाओं से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वास्तविक ज्ञान और सीखने की क्षमता से मापी जानी चाहिए। यदि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी बच्चे पढ़ना-लिखना नहीं सीख पा रहे हैं, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए गंभीर चिंतन का विषय है।
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट
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