गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
सूरत में गैस संकट के बीच श्रमिकों के लिए भोजन व्यवस्था, टेक्सटाइल उद्योग ने दिखाई एकजुटता
गुजरात प्रदेश सूरत के पांडेसरा जी आई डी सी क्षेत्र स्थित भोजनालय में इन दिनों बड़ी संख्या में श्रमिकों के लिए भोजन की विशेष व्यवस्था की जा रही है। सुबह से ही श्रमिकों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग और अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। लगभग 1000 लोग प्रत्यक्ष रूप से बैठकर भोजन कर रहे हैं, जबकि 4000 से अधिक श्रमिकों के लिए पार्सल पैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त स्टाफ की भी नियुक्ति की गई है।
भोजनालय के संचालकों द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि श्रमिकों को केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शुद्ध और सात्विक भोजन मिले, जिससे उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा सके। संचालक हसमुख ठाक्कर ने बताया कि, “हमारा प्रयास है कि श्रमिकों को घर जैसा भोजन मिले। खराब भोजन से श्रमिक बीमार पड़ सकते हैं, जिससे उन्हें और उद्योग दोनों को नुकसान होता है।”
गैस एजेंसियों की लापरवाही और ऑनलाइन बुकिंग की समस्या बहुत है श्रमिकों के अनुसार, बाहर भोजन करने में प्रतिदिन लगभग 100 रुपये खर्च होते हैं, जबकि बीमार पड़ने पर अस्पताल का खर्च अलग से बढ़ जाता है।
दक्षिण गुजरात प्रोसेस एसोसिएशन के प्रमुख जीतू बखरिया ने बताया कि उद्योग हमेशा मुश्किल समय में श्रमिकों के साथ खड़ा रहा है। वर्तमान गैस संकट को देखते हुए भोजन व्यवस्था को और विस्तारित किया गया है। पांडेसरा ही नहीं, अन्य क्षेत्रों के श्रमिक भी यहां आकर टोकन सिस्टम से भोजन कर सकते हैं या पार्सल ले जा सकते हैं।
वहीं पहले भोजनालय की क्षमता 2000 से 2500 लोगों की थी, जिसे बढ़ाकर अब 4000 से 5000 लोगों तक कर दिया गया है। ‘मील-टू-मील’ सेवा के तहत भोजन पैक कर कंपनियों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि श्रमिकों को सुविधा मिल सके और उनका पलायन रोका जा सके। वही श्रमिकों का कहना है कि यदि यह सुविधा नहीं होती, तो उन्हें मजबूरी में अपने वतन लौटना पड़ता। वर्तमान में इस व्यवस्था से उन्हें काफी राहत मिली है और वे काम जारी रख पा रहे हैं।
सूरत के पांडेसरा, सचिन और पलसाना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों प्रवासी श्रमिक रहते हैं। इस संकट के बीच टेक्सटाइल उद्योग ने मानवता का परिचय देते हुए श्रमिकों की मदद के लिए आगे आकर भोजन व्यवस्था को मजबूत किया है। पांडेसरा स्थित भोजनालय को अब एक “मेगा किचन” के रूप में विकसित किया गया है, जहां मात्र 50 रुपये में शुद्ध और सात्विक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
घरेलू गैस संकट के इस दौर में सूरत के टेक्सटाइल उद्योग और भोजनालय संचालकों की यह पहल न केवल श्रमिकों के लिए राहत का कारण बनी है, बल्कि उद्योग को भी स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है
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