शास्त्रीय संगीत साधकों से सजेगी गुरुवर संगीत समारोह शाम

अर्जुन रौतेला आगरा। भारतीय शास्त्रीय संगीत की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय संगीतालय, आगरा द्वारा “गुरुवर संगीत समारोह 2026” का आयोजन दिनांक 03 अप्रैल 2026, सायं 5:00 बजे केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के अटल बिहारी बाजपेयी सभागार में किया जाएगा। यह जानकारी प्रधानाचार्य गजेंद्र सिंह चौहान ने संगीतालय परिसर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। इस मौके पर कार्यक्रम के आमंत्रण पोस्टर का विमोचन भी संगीतालय के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।

प्रधानाचार्य गजेंद्र सिंह चौहान ने इसी क्रम में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 1944 से निरंतर शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन में समर्पित संस्था भारतीय संगीतालय इस विशेष आयोजन के माध्यम से अपने पूज्य गुरुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता आ रहा है। यह समारोह संगीत साधना, गुरु-शिष्य परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का बेशक एक जीवंत उदाहरण है।

इस अवसर पर देश के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित अर्नब चटर्जी जी कोलकाता से पधार रहे है जो अपनी मनमोहक एवं भावपूर्ण गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। पंडित अर्नब चटर्जी हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के किराना घराना परंपरा के एक प्रतिष्ठित एवं अग्रणी गायक हैं। कोलकाता के समीप बसीर हाट में जन्मे अर्नब जी को संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता स्वर्गीय संगीताचार्य श्री अरुण कुमार चटर्जी से प्राप्त हुई। आगे चलकर उन्होंने पंडित ए. कानन, विदुषी मालविका कानन एवं उस्ताद मशकूर अली ख़ाँ जैसे महान गुरुओं से गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे आकाशवाणी व दूरदर्शन के ‘टॉप ग्रेड’ कलाकार हैं तथा देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। उन्हें मुंबई के सुर सिंगार संस्थान द्वारा ‘सुरमणि’ उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। आईटीसी संगीत अनुसंधान अकादमी, कोलकाता से जुड़े अर्नब जी ने न केवल मंचीय प्रस्तुतियों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, बल्कि शिक्षण एवं मार्गदर्शन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे ICCR के पैनल कलाकार हैं तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों में परीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। खयाल एवं ठुमरी गायन में उनकी गहराई, शुद्धता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति समकालीन संगीत जगत के प्रमुख गायकों में स्थापित करती है।

उनके साथ दिल्ली से पधार रहे ख्याति नाम तबला वादक दुर्जेय भौमिक जी उनके साथ संगत करेंगे।कोलकाता की समृद्ध सांस्कृतिक भूमि से जुड़े दुर्जय भौमिक जी ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा बनारस घराने के पंडित दुलाल नुट्टा से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने तालयोगी पंडित सुरेश तलवलकर के सान्निध्य में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत गहन साधना की और तबला वादन की बारीकियों को आत्मसात किया है। लगभग तीन दशकों से अधिक के अपने संगीत सफर में दुर्जय भौमिक जी ने एक कुशल एकल कलाकार (Soloist) और संगतकार (Accompanist) दोनों रूपों में विशेष प्रतिष्ठा अर्जित की है। उनकी सुरीली ध्वनि, उत्कृष्ट तकनीकी कौशल और संगीत के प्रति संवेदनशीलता ने उन्हें देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों तक पहुँचाया है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के अनेक महान कलाकारों के साथ में संगत की है। दुर्जय भौमिक जी आकाशवाणी के टॉप ग्रेड कलाकार हैं। उन्हें संगीत के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें एशियन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा ‘न्यू एज तबला मेस्ट्रो’ की उपाधि तथा कलाश्री सम्मान प्रमुख हैं।

इनके साथ ही, भारतीय संगीतालय के 55 छात्र-छात्राओं द्वारा राग हेमंत में अति सुन्दर सरस्वती वंदन प्रस्तुति किया जाएगा एवं युवा प्रतिभाओं की शास्त्रीय संगीत साधना को प्रोत्साहित करने के क्रम में भारतीय संगीतालय के वरिष्ठ शिष्य सागर जग्गी द्वारा शास्त्रीय गायक का सुंदर प्रदर्शन होगा। तबला पर संगत श्री भानु प्रताप सिंह एवं श्री हरिओम माहौर तथा हारमोनियम संगत डॉ. राहुल निवेरिया व डॉ. वंदना वरुण द्वारा की जानी है।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने ज्ञान, अनुभव और नेतृत्व क्षमता से कराधान (Taxation) के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स, आगरा के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल वर्मा अपना मार्गदर्शन देंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भूतपूर्व IPS बबिता साहू जी द्वारा की जाएगी।

उन्होंने संगीत प्रेमियों एवं शहरवासियों से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस गरिमामय एवं सुरमय संध्या का आनंद लें तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत की इस परंपरा को सशक्त बनाने में सहभागी बनें। पोस्टर विमोचन और प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्था के पदाधिकारीगण भी मौजूद थे। इनमें प्रमुख रूप से सचिव श्री अशोक राव करमरकर, संरक्षक डॉ अमिता त्रिपाठी, श्री हरिओम माहौर, आशू विमल, डॉ वंदना वरुण,सागर जग्गी,श्री आर.के. समाधियां, श्रीमति वीणा छाबड़ा थे।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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