SIR पर रोक, वोटर लिस्ट की जांच और EC के रिकॉर्ड; सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी की 10 बड़ी मांगें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर तुरंत रोक लगाने से लेकर वोटर लिस्ट और EVM के स्वतंत्र ऑडिट तक कुल 10 मांगें की हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर तुरंत रोक लगाने और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांग की है। याचिका में SIR और चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़ी 10 तरह की राहत मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर ‘राहुल गांधी बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया’ नाम से सूचीबद्ध याचिका के मुताबिक, कांग्रेस की कानूनी टीम ने शाम को गांधी के कोर्ट पहुंचने से एक-दो घंटे पहले यह याचिका फाइल कर दी थी। क्योंकि वे शाम 4.30 बजे की समय सीमा से पहले नहीं पहुंच सके, इसलिए वकील एस प्रसन्ना ने याचिका दायर की।
बता दें कि राहुल गांधी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ इंडिया ब्लॉक के मार्च में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और RJD नेता तेजस्वी यादव भी शामिल थे।

                   क्या हैं 10 मांगे?

चुनाव आयोग सभी SIR रिकॉर्ड जमा करे
याचिका में कोर्ट से कहा गया है कि चुनाव आयोग को SIR से जुड़ी पूरी फाइलें, समझौते, बैठकों के मिनट्स, आपत्तियों के रिकॉर्ड और 24 जून 2025 को यह प्रक्रिया शुरू करने के फैसले से जुड़ी ECINET व ERONET एक्सेस लॉग पेश करने का निर्देश दिया जाए। इसका मकसद संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत अधिकारों की सुरक्षा और अनुच्छेद 324 को लागू करना है।

SIR के फैसलों की कानूनी वैधता की जांच हो
याचिका में मांग की गई है कि अदालत जांच करे कि क्या विवादित फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के अनुच्छेद 324, धारा 18 और सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों (जैसे शेषन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 1995) के सिद्धांतों का पालन करते हैं। बिना सही कानूनी अधिकार के लिए गए फैसलों को रद्द किया जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
दायर याचिका में मतदाता सूची बनाने और उसमें बदलाव करने वाले नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। जरूरत पड़ने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत भी कार्रवाई की जाए।

शिकायतों पर फैसले दर्ज किए जाएं
चुनाव आयोग को मौजूदा याचिका और संबंधित शिकायतों पर फैसला करने के लिए कहा गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि SIR से जुड़ा हर फैसला 2023 अधिनियम की धारा 18 के अनुसार हो और ठीक से रिकॉर्ड किया गया हो।

ऑनलाइन फॉर्म 6 में बताए गए नियमों का पालन हो
याचिका के अनुसार, विपक्ष चाहता है कि ऑनलाइन फॉर्म 6, मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुसार हो। नियमों में बदलाव का औपचारिक प्रक्रिया बिना अपनाए, तय फॉर्म से अलग कोई बदलाव न किया जाए।

मतदाता सूची और EVM का स्वतंत्र ऑडिट
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अगुवाई में एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ और जाने-माने नागरिक शामिल हों। यह समिति SIR के दौरान नाम हटाने और बदलावों की जांच करेगी, डेटाबेस एक्सेस (ECINET और ERONET) की जांच करेगी, और EVM के तकनीकी डिजाइन, आर्किटेक्चर, नीतियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी।

हटाए गए नामों की वजह और सूची प्रकाशित हो
SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की बूथ-वार सूची प्रकाशित करने, हर नाम हटाने का कारण बताने और इन्हें लिंग व उम्र के हिसाब से वर्गीकृत करने की मांग की गई है। योग्य मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था भी मांगी गई है।

बिना नोटिस या सुनवाई के नाम न हटाया जाए
कोर्ट से निर्देश मांगा गया है कि कानूनी नोटिस और सुनवाई का मौका दिए बिना किसी मतदाता का नाम न हटाया जाए। पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में योग्य लोगों को निर्धारित अंतिम तारीख तक नाम शामिल करने के लिए आवेदन करने की अनुमति भी दी जाए।

सभी राज्यों में SIR पर अंतरिम रोक
जब तक उठाए गए मुद्दों पर अदालत फैसला नहीं कर लेती, तब तक सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को रोक दिया जाए। विपक्ष के अनुसार, यह योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावों की निष्पक्षता के लिए जरूरी है।

कोई और उचित राहत
अंत में, सुप्रीम कोर्ट से कहा गया है कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए, चुनावी प्रक्रिया और हर योग्य नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा के लिए जो भी अन्य आदेश उचित समझे, वह जारी करे।
यहां आपको बता दें कि यह 10 मांगें याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई है। ये सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए निर्देश नहीं हैं।

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