अवैध मंडी, ईटो से भरे ट्रैक्टरों से टेड़ी बगिया पुलिस रहती है दूर

ईटो से भरे ट्रैक्टरों से टेड़ी बगिया पुलिस रहती है दूर ट्रैक्टरो पर नहीं करती कोई कार्रवाई।

आगरा के थाना ट्रांस यमुना अंतर्गत अवैध ईंट मंडी का शहंशाह कौन…?

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आगरा– चलिए आज हम उन ट्रैक्टरों पर भी नजर कराते हैं। जिन से टेड़ी बगियाँ ट्रैफिक पुलिस दूर रहना चाहती है। देख कर भी अनजान बन जाती है। आखिर ऐसा क्या कारण है। यह तो जांच का विषय बनता है ।टेढ़ी बगिया चौराहे से ट्रैफिक पुलिस के सामने से हर रोज इंटो से भरे ट्रैक्टर निकलते हैं। और ट्रैफिक पुलिस देख कर भी नजरअंदाज कर देती है। आखिर इसका क्या कारण माना जाए ,क्या सभी सिस्टम का खेल है। सूत्रो की माने तो सिस्टम एक बहुत बड़ी चीज है। इसमें बहुत बड़ा झोल बताया जाता है ।समझने वाले समझ रहे होंगे और लिखने वाले भी समझ रहे होंगे ।यहां तक की ट्रैफिक पुलिस भली भांति जानती है। कि आखिर यह सभी सिस्टम का खेल है। लेकिन कभी भी इस पर उच्च अधिकारियों ने नजर नहीं डाली ,अगर नजर डालते और जांच करते तो यह सिस्टम का भी खुलासा हो जाता ,अगर कभी किसी को नो एंट्री में गाड़ी निकलवानी हो तो सिस्टम को याद कर लेना और फिर किसी न किसी रूप में आपको सिस्टम से जुड़े लोग मिल जाएंगे, और वह रास्ता बता देंगे ।कि नो एंट्री में इस तरह से निकलना है ।एवं पुलिस कुछ नहीं कहेगी वाटर वक्स चौराहे पर एक चाय की दुकान काफी मशहूर है , उसी दुकान पर आराम से कोई खड़ा हो जाए आम नागरिक की तरह तो सारा खेल समझ में आ जाएगा ।कि आखिर सिस्टम क्या है ,व कौन-कौन लोग जुड़े हैं सिस्टम से सिस्टम से जुड़े लोग क्या करते हैं ।कुछ दिन के लिए उच्च अधिकारी आम नागरिक की तरह अगर हर चौराहे पर नजर डालें तो सारा खुलासा हो जाएगा। लेकिन सत्य है यह बात है लिखने वाले से लेकर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को भारी कड़वी लग रही होगी और बताते चले आपको थाना ट्रांस यमुना के टेडी बगिया पुलिस चौकी और यातायात पुलिस ईट से लदे ट्रैक्टरों पर मेहरबान है यह पिछले समय में भी काफी सुर्खियों में रह चुके हैं ट्रैक्टर ,कई बार छापा मार कार्रवाई कर चुकी है पुलिस, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पाथ बनकर रह गए।

जबकि आए दिन ट्रैक्टरों से होती है दुर्घटनाएं,

जिसके चपेट में आने से आए दिन होते हैं हादसे, कई लोग अब तक गवा चुके हैं अपनी जान,

कुछ समय के लिए प्रशासन हो जाता है सख्त उसके बाद वापस उसी तरीके से दोबारा से चलने लग जाते हैं ईट से भरे ट्रैक्टर,

लेकिन किसी को क्या मतलब कहा जाता है ।जब चांदी का सितारा दिखता हो तो हर किसी की नजर चकाचैंध हो जाती हैं ।ठीक उसी प्रकार यह सिस्टम भी चल रहा है ।सबके अपने-अपने कोड वर्ड है। सभी से किसी न किसी से कोई ना कोई ट्रैक्टर चालक जुड़ा हुआ है, या फिर ट्रैक्टर मालिक दलालों द्वारा हर चौराहे पर आसानी से ईटो से भरे ट्रैक्टर निकाले जाते हैं,

हर चौराहे पर सक्रिय हैं दलाल, पुलिस से अच्छी खासी है सांठगांठ,

ओवरलोड वजन के कारण ईटों से भरे ट्रैक्टर चलते-चलते आगे से खड़े हो जाते हैं ।जिससे आसपास चलने वाले वाहनों को बेहद खतरे का करना पड़ता है सामना,

ईटों से भरे ट्रैक्टर तिरपाल से ढककर टेडी बगिया चौराहे से सुबह से शाम तक निकलते रहते हैं,

कब होगी कोई ठोस आखिर कार्यवाही कब होगी या फिर सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बड़े धर्मात्मा बनते हैं और बड़ी-बड़ी बातें करते हैं ।तो फिर सिस्टम से क्यों जुड़े हैं। शायद ही कोई इस सच को बाहर निकलेगा अपने मुख से इस समाचार को पढ़ने के बाद सभी में बौखलाहट हो जाएगी धर्मात्मा बनने वाले लोग गुस्से में आ जाएंगे। जो अपने आप को तीरंदाज कहते हैं लिखने वाले कोई किसी के बहाने तो कोई किसी के बहाने सभी जुड़े हुए हैं ।चलिए अब आने वाले समय में क्या होगा यह तो समय ही बताएगा एवं जांच कर उच्च अधिकारी बता पायेंगे कि आखिर यह सिस्टम क्या है।

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gc goyal rajan
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