गुजरात प्रदेश सुरत शहर में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों तथा सरकारी प्रस्तावो एवंम संवैधानिक कर्तव्यों के उल्लंघन के संबंध में तत्काल कानूनी एवं परिणाम कारी कार्यवाही करने के लिए माननीय मंत्री अर्जुन भाई मोडवडीया जी वन एवं पर्यावरण विभाग को कांग्रेस महामंत्री श्री दर्शन भाई ए नायक ने लिखा पत्र

२८/११/२०२५

सूरत शहर में गंभीर वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार National Green Tribunal के आदेशों, सरकारी प्रस्तावों तथा संवैधानिक कर्तव्यों के उल्लंघन के संबंध में तत्काल कानूनी एवं परिणामकारी कार्यवाही करने बाबत

उपरोक्त विषय के संदर्भ में निवेदन है कि गुजरात का आर्थिक हृदय कहे जाने वाला सूरत शहर आज भीषण वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। शहर के लाखों नागरिकों का स्वास्थ्य शासक पक्ष की लापरवाही के कारण गंभीर खतरे में पड़ चुका है। इसका विवरण निम्नानुसार है:

 

1) सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति

 

पिछले कई दिनों से सूरत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 200 से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानदंडों के अनुसार ‘खराब’ (Poor) एवं ‘अत्यंत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है।

 

2) चिंताजनक आंकड़े*

 

25 नवंबर, 2025 को AQI 203 तक पहुंच गया था, जो “वेरी अनहेल्दी” (Very Unhealthy) श्रेणी में आता है। विशेष रूप से PM2.5 का औसत स्तर 100 µg/m³ से अधिक दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) द्वारा निर्धारित 24 घंटे की सीमा 60 µg/m³ से लगभग दोगुना है।

हवा में PM2.5, PM10, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं अमोनिया का स्तर खतरनाक सीमा तक बढ़ जाने से शहर की अस्पतालों में श्वास संबंधी तकलीफ, एलर्जी एवं अस्थमा के मरीजों की संख्या में पिछले एक सप्ताह में 30% से अधिक की वृद्धि हुई है। सूरत वर्तमान में ऑरेंज ज़ोन में है और नागरिकों की सांसें घुट रही हैं।

 

3) कानूनी उल्लंघन एवं जिम्मेदारी में विफलता**

 

एक ओर सूरत महानगरपालिका ग्रीन सिटी के खोखले दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। संविधान के अनुच्छेद 21 एवं माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार ‘स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार’ जीवन का मूल अधिकार है। सरकार इस अधिकार की रक्षा करने में पूर्णतः असफल रही है।

4) National Green Tribunal (NGT) के आदेशों का उल्लंघन*

 

निर्माण कार्यों से उत्पन्न प्रदूषण एवं कचरा प्रबंधन को लेकर NGT द्वारा जारी मार्गदर्शिकाओं (वर्ष 2023–25 के दौरान धूल नियंत्रण, वाटर स्प्रे तथा वेस्ट मैनेजमेंट से संबंधित आदेशों) का पालन नहीं किया जा रहा है।

NGT द्वारा 2025 में गुजरात में नदी प्रदूषण एवं सीवेज प्रबंधन संबंधी सख्त आदेश दिए गए थे, किंतु उनका भी खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

 

5) सरकारी प्रस्तावों का उल्लंघन*

 

गुजरात सरकार के मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स द्वारा दिनांक 26/09/2023 को आदेश क्रमांक: सायवयो/टे.7/ब/466–548/2023–24 के अंतर्गत सूरत सहित पूरे गुजरात में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कोनोकार्पस के पौधों को हटाने के निर्देश दिए गए थे, फिर भी आज तक सूरत शहर एवं जिले में इन पौधों को नहीं हटाया गया है।

 

6) सूरत शहर एवं जिले में मैंग्रोव तथा पुराने घने वृक्षों का विनाश**

 

सूरत शहर एवं जिले में प्रशासन द्वारा विकास के नाम पर ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पुराने एवं घने वृक्षों को बड़े पैमाने पर काटा गया है।

सूरत में (विशेष रूप से हजीरा, डुमस, ओलपाड़, कामरेज और तापी–मिंधोला नदी के मुहाने पर) कभी विशाल मैंग्रोव वन क्षेत्र था, परंतु तीव्र औद्योगिकीकरण, बंदरगाह विकास, शिपयार्ड, SEZ और शहरी विस्तार के कारण पिछले 30–40 वर्षों में 80–90% मैंग्रोव आवरण नष्ट हो चुका है।

 

7) उद्योगों की प्रमुख भूमिका

 

हजीरा एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से शहर के 56% (77,540 टन) पार्टिकुलेट मैटर (PM) का उत्सर्जन होता है। इसमें PM2.5 एवं PM10 के कणों का अनुपात अत्यधिक होता है। उद्योगों से निकलने वाले धुएं एवं कार्बनिक उत्सर्जन से AQI बढ़ता है, जिससे श्वसन संबंधी रोग, हृदय रोग एवं अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

 

सूरत के नागरिकों की समस्या के समाधान हेतु हमारी तात्कालिक एवं परिणामकारी मांगें:

1. उद्योगों का सख्त ऑडिट एवं दंडात्मक कार्यवाही*

 

* गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध एयर एक्ट, 1981 के तहत तत्काल बंदी (Closure) एवं भारी दंडात्मक कार्यवाही की जाए।

* 24 घंटे के भीतर प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (ETP/STP/Air Filters) की सख्त एवं निष्पक्ष जांच शुरू की जाए।

 

2. निर्माण कार्यों पर NGT के अनुसार नियंत्रण* निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण हेतु वाटर स्प्रिंकलिंग, ग्रीन नेट एवं वाहनों के कवरिंग का कड़ाई से पालन कराया जाए। नियमों का पालन न करने वाले बिल्डरों पर “Polluter Pays Principle” के तहत भारी जुर्माना लगाया जाए।

 

3. ग्रीन कवर और परिवहन शहर में ग्रीन कवर बढ़ाने हेतु युद्ध स्तर पर वृक्षारोपण अभियान शुरू किया जाए। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाए तथा अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए।

 

4. प्रदूषण बोर्ड को सशक्त बनाना* गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) को तत्काल तकनीकी एवं मानव संसाधनों से सशक्त किया जाए बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने हेतु दैनिक मॉनिटरिंग एवं ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

 

5. AQI की दैनिक सार्वजनिक जानकारी* सूरत महानगरपालिका द्वारा प्रतिदिन AQI की जानकारी आम नागरिकों को स्पष्ट रूप से दी जाए एवं स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियां (Health Advisories) जारी की जाएं।

यदि सरकार एवं स्थानीय प्रशासन अब भी आंखें मूंदे रखेगा, तो सूरत के नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा हेतु हमें कानूनी मार्ग (Legal Recourse) अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

आपसे मेरी इस प्रस्तुति पर त्वरित एवं सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा है, जिससे पर्यावरण तथा सूरतवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्मके खिलाफ सूरत से संवाददाता राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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