अर्जुन रौतेला आगरा। सुप्रसिद्ध जूता उद्योगपति एवं सामाजिक चिंतक पूरन डावर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के राजनीतिक सफर को भारतीय राजनीति में नेतृत्व की एक विशिष्ट यात्रा बताया है। अपने लेख में उन्होंने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पारी से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल और विकसित भारत के संकल्प तक की यात्रा को रेखांकित किया है।
पूरन डावर ने लिखा कि नरेंद्र मोदी को गुजरात की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली, जब राज्य भूकंप की त्रासदी से उबर रहा था। उन्होंने बिजली, कृषि, गांव और उद्योग को विकास के केंद्र में रखकर काम किया। लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जनता का विश्वास हासिल करना उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण संकेत रहा।

लेख में गुजरात में तकनीक और विकास के समन्वय का उल्लेख करते हुए ई-ग्राम जैसी पहलों तथा वाइब्रेंट गुजरात के माध्यम से निवेश और उद्योग को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने की कोशिशों को मोदी की कार्यशैली की प्रमुख विशेषता बताया गया है। पूरन डावर के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता, तकनीक के उपयोग और जनता से सीधे संवाद ने नरेंद्र मोदी की राजनीतिक शैली को अलग पहचान दी।

पूरन डावर ने अपने लेख में नरेंद्र मोदी के आगरा से जुड़े राजनीतिक प्रसंग का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में विजय शंखनाद रैली की शुरुआत आगरा से हुई थी और उस अवसर पर उन्हें नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला था। उन्होंने उस अवसर के भाषण की स्मृति को आज भी अपने मन में अक्षुण्ण बताया है।
लेख में वर्ष 2013 में भाजपा के भीतर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में उभरने और 2014 में पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता संभालने की राजनीतिक यात्रा का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों के नेताओं को आमंत्रित करने की पहल को क्षेत्रीय सहयोग के संदेश से जोड़ा गया है।

पूरन डावर ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सामने आए ‘सबका साथ, सबका विश्वास’, आत्मनिर्भर भारत और वर्ष 2047 तक विकसित भारत जैसे संकल्पों को भी रेखांकित किया। उन्होंने महामारी जैसे कठिन दौर में भारत की चुनौतियों से निपटने की क्षमता का उल्लेख करते हुए मोदी के नेतृत्व को निर्णायक बताया।
लेख के अंत में पूरन डावर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 25 वर्ष की राजनीतिक यात्रा के लिए बधाई देते हुए उनके दीर्घायु और लंबे समय तक देश का नेतृत्व करने की कामना की है। उन्होंने लिखा कि जब तक नेतृत्व की क्षमता, करिश्मा और जनता की स्वीकार्यता कायम है, तब तक थकने या रुकने का सवाल नहीं होना चाहिए।
“कैसे कह दूं कि थक गया हूं मैं,
जाने कितनों का हौसला हूं मैं…”
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