गुजरात प्रदेश हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
जर्जर इमारतों पर नगर निगम की सुस्ती बनी जानलेवा, हजारों भवन अब भी खतरे की जद में
सूरत, 1 अगस्त। शहर में जर्जर इमारतों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। हाल ही में एक जर्जर भवन का हिस्सा गिरने से एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद भी नगर निगम की कार्यवाही सवालों के घेरे में है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार शहर में कुल 3308 जर्जर इमारतें चिन्हित की गई थीं, जिनमें से 3302 भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन अब तक केवल 716 भवनों में ही मरम्मत का कार्य हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार 1924 जर्जर भवनों में अब तक मरम्मत शुरू नहीं हुई, जबकि 599 भवन खाली होने के बावजूद सील नहीं किए गए हैं। इसके अलावा 668 भवनों को तोड़ा जा चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में जर्जर भवन आज भी लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।
सर्वाधिक चिंता का विषय यह है कि सेंट्रल ज़ोन में सबसे अधिक जर्जर इमारतें स्थित हैं। वहीं भागल क्षेत्र में हाल ही में भवन का हिस्सा गिरने से 72 वर्षीय महिला की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद कई भवनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में भय और नाराज़गी है।
भवन मालिकों का कहना है कि एक भवन की मरम्मत पर 8 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जिसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवार मरम्मत कराने में असमर्थ हैं। दूसरी ओर, प्रशासन की धीमी कार्रवाई से दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है।
शहरवासियों ने नगर निगम से मांग की है कि सभी जर्जर भवनों का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, खतरनाक भवनों को तत्काल खाली कराकर सील किया जाए तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें ध्वस्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
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