अर्जुन रौतेला आगरा। रामायण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली देशभर की 28 विभूतियों को इस वर्ष ‘रामायणी सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। इनमें आगरा के वरिष्ठ कवि, साहित्यकार एवं राम काव्य मर्मज्ञ पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ का नाम भी शामिल है। प्रख्यात भजन गायक अनूप जलोटा और सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल भी इस राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत होंगी।
रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर 19 अगस्त को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी स्थित मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से ‘रामायणी सम्मान’ समारोह आयोजित किया जाएगा।

रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी एवं सम्मान समारोह के संयोजक आगरा निवासी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. देव दत्त शर्मा ने बताया कि इस वर्ष सम्मान के लिए सात श्रेणियां निर्धारित की गई थीं। इनमें रामायण शोध सम्मान, रामकथा वाचन सम्मान, रामायण साहित्य सम्मान, रामायण संगीत सम्मान, बाल रामायणी सम्मान, राष्ट्रसेवा रामायणी सम्मान तथा श्रीसीताराम-पथिक सम्मान शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि 9 जुलाई से 26 जुलाई तक चली नामांकन प्रक्रिया में गूगल फॉर्म, ई-मेल और कूरियर के माध्यम से देशभर से 250 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए। चयन समिति ने निर्धारित मानकों के आधार पर सभी नामांकनों का गहन परीक्षण और विचार-विमर्श करने के बाद 28 विशिष्ट विभूतियों का चयन किया।
आगरा के लॉयर्स कॉलोनी निवासी पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार हैं। वे राम काव्य के मर्मज्ञ के रूप में पहचान रखते हैं और पिछले करीब पांच दशकों से आगरा सहित देश के विभिन्न प्रांतों में सुंदरकांड का मधुर वाचन कर रहे हैं। रामायण एवं श्रीरामचरितमानस के प्रति उनके दीर्घकालीन योगदान को देखते हुए उनका चयन ‘रामायणी सम्मान’ के लिए किया गया है।

रामायण रिसर्च काउंसिल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष एवं सांसद अजय भट्ट ने कहा कि ‘रामायणी सम्मान’ केवल व्यक्तियों का अभिनंदन नहीं, बल्कि भारतीय सनातन सांस्कृतिक परंपरा, भारतीय ज्ञान-विरासत और भगवान श्रीराम एवं मां सीता के आदर्शों के प्रति सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है। इसका उद्देश्य रामायण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना, विभिन्न रामायण परंपराओं एवं शोध कार्यों को मुख्यधारा में लाना तथा नई पीढ़ी को रामायण साहित्य और भारतीय संस्कृति से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पारिवारिक एवं सामाजिक मूल्यों के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे में श्रीरामचरितमानस और रामायण के माध्यम से समाज में शांति, धैर्य, मर्यादा और पारिवारिक सौहार्द के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की आवश्यकता है।

काशी में आयोजन को बताया गौरव का विषय
साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना मुख्य रूप से काशी की पावन धरती पर की थी। ऐसे में काशी में ‘रामायणी सम्मान’ का आयोजन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि काशी की आध्यात्मिक भूमि पर आयोजित होने वाला यह समारोह देश के उन व्यक्तित्वों को सामने लाएगा, जिन्होंने रामायण, अध्यात्म, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

अजय भट्ट ने बताया कि रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा प्रभु श्रीराम के मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं। कोरोना काल में देशभर में डिजिटल रामलीला का मंचन किया गया। अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर आंदोलन पर आधारित 1250 पृष्ठों का ग्रंथ ‘श्रीरामलला-मन से मंदिर तक’ तैयार किया गया। संस्कृत एवं रामायण साहित्य को बढ़ावा देने के लिए पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का प्रकाशन भी किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सीतामढ़ी में श्रीरामजानकी स्थान पर 12 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहां काउंसिल की ओर से विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। यहां 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं ज्योत लाकर अखंड ज्योत स्थापित करने तथा चतुर्भुजा महालक्ष्मी की स्थापना की योजना है। प्राचीन मठ के जीर्णोद्धार का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।
ये 28 विभूतियां होंगी सम्मानित
‘रामायणी सम्मान’ के लिए चयनित 28 विभूतियों में अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, आर.के. सिन्हा, स्व. किशोर कुणाल (मरणोपरांत), डॉ. अर्चना प्रकाश, भगवान दास, डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. अवधि हरि, योगेश्वर प्रसाद देवरानी, आदित्य जैन, अभय माणके, संत हरिओम, नरेंद्रनाथ गगन, पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’, संजीव, डॉ. आशा ओझा, मदगुल्ला प्रफुल्ला, बिनोद कुमार तिवारी, डॉ. चंद्र प्रभा मदान, आचार्य संतोष पांडेय, अजय याग्निक, विंध्याचल मणि त्रिपाठी, राजराधे कृष्ण शर्मा, प्रेम प्रकाश दुबे, त्रिलोकी नाथ पांडेय, रामधनी द्विवेदी, डॉ. रविशंकर पांडेय और रेखा मेहरा शामिल हैं।
रामायण रिसर्च काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत और सचिव पिताम्बर मिश्र ने संत-महात्माओं, विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, साहित्यकारों, रामकथाकारों, कलाकारों तथा प्रबुद्ध नागरिकों से 19 अगस्त को बीएचयू, वाराणसी में होने वाले राष्ट्रीय सम्मान समारोह में सहभागिता का आग्रह किया है।
अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461
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