राम भक्ति रस से सराबोर हुई बंबई वाली बगीची, सुंदरकांड के संगीतमय गायन ने बांधा समां

अर्जुन रौतेला आगरा। बंबई वाली बगीची-खंदारी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर मंगलवार को रामभक्ति, संगीत और साहित्य के अद्भुत संगम का साक्षी बना। रामायण रिसर्च काउंसिल, निर्मल लिटरेचर एंड म्यूजिक फाउंडेशन एवं श्री श्री आनंदमयी माँ मानस परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में रामायणी सम्मान से विभूषित रामचरितमानस मर्मज्ञ एवं वरिष्ठ कवि-साहित्यकार पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ का नागरिक अभिनंदन किया गया। इस दौरान पावन सुंदरकांड के संगीतमय गायन और राम काव्य रस वर्षा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

आचार्य गौरव शुक्ला (कानपुर) द्वारा व्यास पूजन के बाद पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ ने आगरा से अजय पाठक तथा कानपुर से योगेश भसीन और विनय तिवारी के साथ विभिन्न राग-तालों में सुंदरकांड का संगीतमय गायन किया। ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन’ और ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ से शुरू हुए गायन के दौरान जब ‘रामकाज कीने बिना मोहि कहाँ विश्राम’ की पंक्तियां गूंजीं तो मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा।

समारोह अध्यक्ष अयोध्या धाम के संत प्रवर मिथिलेशशरण नंदिनी जी महाराज ने कहा कि श्रीरामचरित भारत की आत्मा का स्वर है और प्रतिकूल परिस्थितियों में रामचरित मनुष्य का संबल बनता आया है। उन्होंने कहा कि योगेश शर्मा जी रामचरितमानस को गाते ही नहीं, बल्कि उसके शब्द-शब्द की अर्थच्छवि को उद्भासित करते चलते हैं। मनकामेश्वर धाम के महंत योगेश पुरी और बल्केश्वर धाम के महंत कपिल नागर ने भी राम नाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पं. योगेश शर्मा को शुभाशीष प्रदान किया।

रामायण रिसर्च काउंसिल, निर्मल लिटरेचर एंड म्यूजिक फाउंडेशन के साथ अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, संस्कार भारती जिला आगरा, संस्कार भारती पश्चिम प्रताप शाखा, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया-आगरा चैप्टर, रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल, आगरा बार एसोसिएशन, ब्रजभाषा काव्य मंच, माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच, साहित्य निधि ओपन कला मंच, समानांतर, सारंग फाउंडेशन, ऑड ईवन फिल्म्स और जयवी सा ग्रुप प्रॉपर्टी वाला सहित एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ का नागरिक अभिनंदन किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. गिरीश गुप्ता, रमा वर्मा, आचार्य पं. दाऊ दयाल शास्त्री और राज बहादुर सिंह ‘राज’ सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। निर्मल लिटरेचर एंड म्यूजिक फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश निर्मल ने संचालन किया, जबकि रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी एवं सेवानिवृत्त आईएएस देवदत्त शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

कविता ने छुआ श्रोताओं का मर्म

राम काव्य रस वर्षा के दौरान पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ ने अपने काव्य संग्रह ‘श्री राम चरणामृत’ से ‘कंटक करुण कथा’ प्रस्तुत की। ‘रघुनंदन मोहि निकारियो ना’ की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया और पूरे वातावरण को रामभक्ति के रंग में रंग दिया।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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